Hemant Soren Assam Visit : असम में हेमंत सोरेन की एंट्री से सियासी तापमान बढ़ा, आदिवासी वोट बैंक पर झामुमो की सीधी नजर
Hemant Soren Assam Visit
असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नई हलचल दिखाई (Hemant Soren Assam Visit) देने लगी है। झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) अध्यक्ष Hemant Soren की असम में सक्रियता को इसी बदले सियासी समीकरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खास तौर पर आदिवासी और चाय बागान मजदूरों के मुद्दों को लेकर उनकी मौजूदगी ने सत्ताधारी और विपक्ष – दोनों खेमों में चर्चा तेज कर दी है।
हाल ही में हेमंत सोरेन असम के तिनसुकिया जिले पहुंचे, जहां उन्होंने एक विशाल आदिवासी महासभा को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन आल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम की ओर से किया गया था, जिसमें करीब 30 हजार लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है। मंच से दिया गया यह संदेश केवल सामाजिक सरोकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आदिवासी पहचान, एकजुटता और राजनीतिक अधिकारों को लेकर स्पष्ट संकेत दिखाई दिए।
सभा को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने आदिवासी समुदाय से संगठित होकर मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समाज एकजुट हो जाए, तो वह असम की राजनीति की दिशा बदलने की ताकत रखता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राजनीतिक सशक्तिकरण के जरिए झारखंड की तरह असम में भी आदिवासी परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग संभव हो सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने चाय बागान मजदूरों की स्थिति को लेकर भी तीखी (Hemant Soren Assam Visit) बात रखी। हेमंत सोरेन ने कहा कि वैश्विक चाय उद्योग आदिवासी श्रम पर टिका है, लेकिन इसके बावजूद यही समुदाय सबसे ज्यादा शोषण झेल रहा है। उन्होंने मजदूरी का जिक्र करते हुए कहा कि जहां अन्य राज्यों में चाय मजदूरों को 400 से 500 रुपये प्रतिदिन तक मिलते हैं, वहीं असम में मजदूरी अब भी करीब 250 रुपये पर अटकी हुई है, जो लंबे समय से जारी अन्याय को दर्शाता है।
यह पहल अचानक नहीं मानी जा रही। जनवरी के मध्य में झामुमो का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहले ही असम का दौरा कर चुका है। इस प्रतिनिधिमंडल में जनजातीय कार्य मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा और विधायक एमटी राजा व भूषण तिर्की शामिल थे। दौरे के दौरान आदिवासी नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठकों में चाय बागान मजदूरी, भूमि अधिकार, शिक्षा-स्वास्थ्य की स्थिति और पूर्ण अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की लंबित मांग जैसे मुद्दों पर मंथन हुआ।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, झामुमो असम की करीब 35 से 40 विधानसभा सीटों पर फोकस कर रहा है, जहां आदिवासी और चाय बागान मजदूर निर्णायक भूमिका (Hemant Soren Assam Visit) निभाते हैं। असम की कुल आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत मानी जाती है, लेकिन बड़ी आबादी आज भी पूर्ण जनजातीय दर्जे और अधिकारों से वंचित है।
हालांकि, असम में सत्तारूढ़ दल झामुमो की गतिविधियों को सीमित प्रभाव वाला बता रहा है और उसका तर्क है कि पार्टी की वहां कोई मजबूत सांगठनिक पकड़ नहीं है। वहीं झामुमो नेतृत्व का कहना है कि फिलहाल यह दौरे जमीनी आकलन और संवाद के लिए हैं, जबकि चुनावी फैसले शीर्ष स्तर पर लिए जाएंगे।
इतना तय है कि हेमंत सोरेन की असम में बढ़ती सक्रियता ने आदिवासी राजनीति को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की चुनावी बहस का अहम हिस्सा बन सकता है।
