छत्तीसगढ़

High Court PIL Fee Increase : हाई कोर्ट में जनहित याचिका के साथ जमा करना होगा 15 हजार रुपये

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (हाई कोर्ट) ने पीआइएल (जनहित याचिका) (High Court PIL Fee Increase) के साथ जमा किए जाने वाले शुल्क (शुल्क) में तीन गुना वृद्धि कर दी है। अब किसी भी पीआइएल के लिए याचिकाकर्ताओं को 15,000 रुपये जमा करने होंगे। इससे पहले यह राशि केवल 5,000 रुपये थी।

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शुक्रवार को एक पीआइएल की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने इसलिए सुनवाई करने से इनकार किया क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने पुराने नियमों (नियम) के तहत 5,000 रुपये जमा किए थे। डिवीजन बेंच ने नए नियमों (नियम) के अनुसार शुल्क जमा करने की अनिवार्यता स्पष्ट की और कहा कि जमा करने के बाद ही पीआइएल की सुनवाई (सुनवाई) की जाएगी।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अब विभिन्न मामलों पर जनहित याचिकाएं (पीआइएल) दायर करने के लिए सुरक्षा निधि (सुरक्षा निधि) 15,000 रुपये जमा करना अनिवार्य हो गया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की डिवीजन बेंच में शुक्रवार को कोरबा डीएमएफ फंड में अनियमितता की जांच को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने 15,000 रुपये की धनराशि में छूट देने का आवेदन किया था।

हालांकि, खंडपीठ ने यह आवेदन स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि गंभीर जनहित याचिकाओं (जनहित याचिका) के लिए याचिकाकर्ताओं को यह राशि जमा करने के लिए तैयार रहना होगा।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और सुदीप वर्मा ने निवेदन किया कि पूर्व में यह शुल्क केवल 5,000 रुपये था और इसे तीन गुना बढ़ा दिया गया है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि प्रारंभ में इतनी बड़ी राशि जमा करने में छूट दी जाए,

ताकि याचिकाकर्ता बिना वित्तीय दबाव के याचिका (पीआइएल) दायर कर सकें। खंडपीठ ने कहा कि यदि सुनवाई के बाद यह लगे कि याचिका वास्तव में जनहित (जनहित) के लिए थी तो जमा की गई राशि वापस कर दी जाएगी।

क्या है जनहित याचिका

दायर की गई जनहित याचिका (पीआइएल) में कोरबा डीएमएफ फंड (डीएमएफ) के तहत पिछले 10 वर्षों में 4,000 करोड़ रुपये के उपयोग में नियमों (नियम) और गाइडलाइन का उल्लंघन करने की बात कही गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फंड के द्वारा लगाई जा रही नौकरियों में प्रभावित व्यक्तियों को मौका नहीं दिया गया, बिना योजना के मनमाने ढंग से बिल्डिंगों में पैसा खर्च किया गया और कई प्रभावित लोगों को लाभ नहीं मिला।

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खास बात यह है कि अब हाई कोर्ट (हाई कोर्ट) में पीआइएल (पीआइएल) दायर करने वाले सभी याचिकाकर्ताओं को 15,000 रुपये सुरक्षा निधि (सुरक्षा निधि) जमा करना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल गंभीर और सही उद्देश्य से ही याचिका दायर की जाए।

डिवीजन बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यदि भविष्य में गलत या अनुचित याचिका दायर करते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कदम पीआइएल (जनहित याचिका) की गंभीरता और प्रभावशीलता (प्रभावशीलता) को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

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