Puri Temple Controversy : इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर के वीडियो से पुरी में विवाद, मंदिर प्रशासन ने जांच शुरू की

Puri Temple Controversy

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पुरी में इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर शुभांकर मिश्रा द्वारा प्रसारित वीडियो ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में दावा किया गया कि अविवाहित जोड़ों के मंदिर आने पर उनका संबंध टूट सकता है, क्योंकि राधा रानी के कथित ‘श्राप’ के चलते ऐसा होता है। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि राधा रानी को मंदिर में प्रवेश से रोका गया था, जिसके कारण उन्होंने मंदिर को श्राप दिया। यह पूरा प्रकरण अब (Puri Temple Controversy) का केंद्र बन गया है।

मामला सामने आते ही श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने शनिवार को जांच के लिए एक समिति गठित कर दी। प्रशासन ने साफ कहा कि मंदिर से जुड़े किसी भी विषय को साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है। एसजेटीए ने यह भी चेतावनी दी है कि गलत सूचनाएँ फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं पर रोक लग सके। पूरे मामले को अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि (Puri Temple Controversy) ने सोशल मीडिया में तेजी से विस्तार पाया है।

जिलाधिकारी और एसजेटीए के उप मुख्य प्रशासक दिव्य ज्योति परीडा ने कहा कि वीडियो के आधार पर गलत जानकारी फैलाना अस्वीकार्य है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस बीच पुरी के धार्मिक विद्वानों और सेवायतों ने वीडियो के दावों को पूरी तरह असत्य, आधारहीन और कल्पित बताया है।

जगन्नाथ संस्कृति के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. भास्कर मिश्रा ने स्पष्ट कहा, “मेरे शोध में ऐसी कोई कथा नहीं मिलती—यह पूर्णतः मनगढ़ंत है।” वरिष्ठ सेवायत हजुरी कृष्णचंद्र खुंटिया ने भी कहा कि यह वीडियो धार्मिक भावनाओं को आहत करता है और केवल लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास है। ऐसी टिप्पणियों से स्पष्ट है कि (Puri Temple Controversy) ने पुरी की धार्मिक परंपराओं और विश्वासों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है।

इस विवाद ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक धार्मिक सामग्री के खतरों को उजागर किया है। प्रशासन का कहना है कि यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए एसजेटीए की जांच समिति जल्द ही रिपोर्ट देगी और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी—ताकि (Puri Temple Controversy) का प्रभाव और अधिक न फैल सके।

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