Repo Rate Cut India : रेपो रेट में संभावित कटौती से और तेज होगी आर्थिक वृद्धि, एमपीसी बैठक से बढ़ी उम्मीदें

देश की जीडीपी के ताज़ा आंकड़ों ने अर्थशास्त्रियों और रेटिंग एजेंसियों के अनुमान (Repo Rate Cut India) को पीछे छोड़ दिया है। दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर) में विकास दर 8.2 प्रतिशत दर्ज होने के बाद अब पूरे वित्त वर्ष 2025–26 में भारत की आर्थिक वृद्धि 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना मजबूत हुई है।

मजबूत आर्थिक संकेतकों को देखते हुए आगामी एमपीसी बैठक (3–5 दिसंबर) में रेपो रेट में कम से कम 0.25 प्रतिशत की कटौती की उम्मीद की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतिम तिमाही में विकास की रफ्तार को और बढ़ाएगा और (Repo Rate Cut India) के प्रभाव से उद्योगों को पूंजी उपलब्धता में राहत मिलेगी।

क्रिसिल, इक्रा सहित कई एजेंसियों ने तिमाही विकास दर को 7.5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान दिया था, लेकिन वास्तविक वृद्धि 8.2 प्रतिशत आने से सभी अनुमान पीछे छूट गए। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महंगाई (Repo Rate Cut India) चार प्रतिशत से नीचे स्थिर रहने से ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश और बढ़ी है। आनंद राठी समूह के मुख्य अर्थशास्त्री सुजन हाजरा के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौ प्रतिशत और सेवाओं में दहाई अंक की वृद्धि यह दर्शाती है कि इकोनमी के सभी प्रमुख सेक्टर मजबूत गति पकड़ रहे हैं।

वित्त वर्ष की शुरुआत में आरबीआई ने वृद्धि दर का अनुमान 6.5 प्रतिशत रखा था, जिसे पहली तिमाही के बाद बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत किया गया। उस समय दूसरी तिमाही की वृद्धि 7 प्रतिशत रहने का आधार लिया गया था, लेकिन अब वास्तविक आंकड़ा 8.2 प्रतिशत आने से संभव है कि आरबीआई 5 दिसंबर को विकास दर का नया अनुमान जारी करे। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि उद्योग जगत को सस्ता कर्ज मिलते ही निवेश और विस्तार योजनाएँ तेज़ होंगी, जिससे (Repo Rate Cut India) का सकारात्मक प्रभाव देश की ग्रोथ पर सीधे दिखेगा।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी संकेत दे चुके हैं कि व्यापक आर्थिक संकेतकों में सुधार को देखते हुए दिसंबर समीक्षा में कटौती संभव है। उनका कहना है कि महंगाई नियंत्रण में रहने से विकास को प्राथमिकता देने की गुंजाइश बढ़ गई है। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य मूल्य स्थिरता और विकास—दोनों को संतुलित रखना है, और मौजूदा परिस्थितियाँ दरों में राहत की दिशा में अनुकूल मानी जा रही हैं।