छत्तीसगढ़

Mahanadi Water Dispute  : महानदी की पुकार…अब जनआंदोलन से पीएम तक पहुंचेगी पानी की लड़ाई…

Mahanadi water dispute  : छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से जल रही महानदी जल विवाद की आग अब नया रूप ले चुकी है। रायपुर में हुई सर्वदलीय बैठक में तय हुआ कि अब यह लड़ाई केवल प्रशासनिक न रहकर जन-जन की आवाज बन चुकी है।

‘महानदी बचाओ आंदोलन’ (Mahanadi water dispute) के बैनर तले हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में न सिर्फ राजनीतिक दलों बल्कि सामाजिक संगठनों, जल विशेषज्ञों और पुराने आंदोलनकारियों ने एक स्वर में प्रधानमंत्री से सीधा हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 262 के अंतर्गत जल विवाद निपटान प्राधिकरण का गठन करे, तो वर्षों से खिंचता आ रहा यह मुद्दा न्यायिक और तकनीकी समाधान की ओर बढ़ सकता है।

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प्रमुख बिंदु जो सामने आए:

ओडिशा को गैर-मानसून सीजन में 1.74 एमएएफ पानी छोड़ने की पुरानी सहमति का पालन करना चाहिए।

केंद्र को हस्तक्षेप कर दोनों राज्यों की सरकारों और विशेषज्ञों के साथ संयुक्त उच्च स्तरीय बैठक बुलानी चाहिए।

अगस्त के अंतिम सप्ताह में तकनीकी बैठक का आयोजन होगा, जिसमें दोनों राज्यों के अधिकारी शामिल होंगे।

एक टास्क फोर्स का गठन किया गया जिसमें पूर्व अधिकारी, मंत्री और सामाजिक कार्यकर्ता(Mahanadi water dispute) शामिल हैं।

‘सुखासोडा से पारादीप तक नदी यात्रा’ का ऐलान – जिससे नदी के संरक्षण हेतु जनजागृति फैलाई जाएगी।

अब मामला केवल राज्यों के बीच की खींचतान नहीं रहा, बल्कि यह संघर्ष पानी, पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों का बन चुका है।

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