संपादकीय: आखिरकार डोनाल्ड ट्रंप का यू-टर्न

Editorial: खुद को सीजफायर का स्पेशलिस्ट बताने वाले अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ खुद होकर पांच दिनों के लिए संघर्ष विराम करने की घोषणा करनी पड़ गई। डोनाल्ड ट्रंप का यह यूटर्न बताता है कि अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है। दरअसल उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि ईरान जैसा छोटा सा देश अमेरिका को सबक सिखा देगा। बावजूद इसके की अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्यवाही में इजराइल जैसे देश का भी सहयोग लिया था किन्तु ईरान ने अकेले अपने दम पर अमेरिका और इजराइल दोनों से लोहा ले लिया। यही नहीं बल्कि ईरान ने खाड़ी के उन देशों पर भी कहर ढाना शुरू कर दिया जो अमेरिका के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं।
ईरान ने होर्मूज स्टे्रट की नाकाबंदी करके खाड़ी देशों को जोर का झटका दे दिया। गौरतलब है कि ईरान के आधिपत्य वाले होर्मूज से होकर ही खाड़ी देशों का तेल दुनियाभर में जाता है। हर माह तीन हजार से अधिक जहाज होर्मूज से होकर जाते हैं। इस तरह दुनिया के देशों का 20 प्रतिशत तेल यही से होकर गुजरता है। इसपर ईरान ने पहरा बिठाकर पूरी दुनिया के सामने। तेल का संकट खड़ा कर दिया। नतीजतन अनेक देशों में पेट्रोल और डीजल तथा गैस के दाम आसमान छूने लगे और ऐसे सभी देश इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहरा कर उनकी अलोचना करने लगे।
होर्मूज पर ईरान ने अपने मित्र राष्ट्रो को ही तेल ले जाने की इजाजत दी थी जिसमें एक देश भारत भी है। दुश्मन देशों के तो जहाजों को उसने बम का निशाना बनाना शुरू कर दिया था। वहीं अन्य देशों से उसने भारी रकम वसूलना भी प्रारंभ कर दिया था। होर्मूज की नाकाबंदी डोनाल्ड ट्रंप के लिए परेशानी का सबसे बड़ा सबब बन गई थी और होर्मूज को खोलने के लिए उसने ईरान पर दबाव बनाने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था लेकिन ईरान ने भी धमकी के जवाब में और बड़ी धमकी देकर अमेरिका और इजराइल सहित तमाम खाड़ी देशों के होश उड़ा दिये थे।
ऐसे में संयुक्त अरब सहित सभी खाड़ी देशों ने डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाया कि वह यह जंग रोकें वरना हम सभी तबाह हो जाएंगे। खुद अमेरिका के भीतर भी डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी अलोचना का सामना करना पड़ रहा था और उन्हें यह डर सताने लगा था कि यदि उन्होंने हटधर्मिता नहीं छोड़ी तो शीघ्र ही होने वाले मध्यावधि चुनाव में उनकी पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ेगा और उनका राष्ट्रपति पद भी खतरे में पड़ जाएगा।
नतीजतन उन्हें झकमारकर पांच दिनों के लिए एकतरफा संघर्ष विराम का एलान करना पड़ा। दरअसल 25 दिनों से चल रहे इस जंग में ईरान और इजराइल को जो नुकसान हुआ है उससे कम ही सही लेकिन अमेरिका को भी इसका नुकसान उठाना पड़ा है। यदि यह जंग और लंबी चल जाती है तो सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था गड़बडाने के साथ खदु अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी लडख़ड़ा जाएगी।
यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप को यूटर्न लेनेे के लिए बाध्य होना पड़ा है और हेठी न हो इसके लिए यह झूठ बोल रहे हैं कि ईरान से दो दिनों तक उनकी बातचीत हुई है और यह वार्ता आगे भी सकारात्मक हो इसलिए वे पांच दिनों के संघर्ष विराम की घोषणा कर रहे हैं उनके यह झूठ का ईरान ने तत्काल पर्दाफाश कर दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि ईरान की अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।
डोनानाल्ड ट्रंप ने ईरान के हमलों से और धमकी से डरकर एकतरफा सीजफायर का ऐलान किया है। ईरान ने यह भी धमकी दी है कि वह अपने हमले जारी रखेगा। अगर अमेरिका या इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट को निशाना बनाने की हिमाकत की तो ईरान खाड़ी देशों में तबाही मचा देगा। ईधर इजराइल ने भी डोनाल्ड ट्रंप के संघर्ष विराम की घोषणा के बावजूद ईरान पर अपने हमले जारी रखें हैं और इरान भी इजराइल पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है।
ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की इस घोषणा के बाद भी यह जंग रूक जाएगी इसकी संभावना कम ही है। अब देखना होगा कि अमेरिका के पांच दिनों के सीजफायर के बाद इस जंग को रोकने के लिए अमेरिका और इजराइल के बीच कोई वार्ता होती है या नहीं और अगर वार्ता होती भी है तो उसका क्या नतीजा निकलता है।



