संपादकीय: अब डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर ईरान

Donald Trump now targets Iran

Editorial: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला का किला फतह करने के बाद अब ईरान पर निशाना साधने की तैयारी शुरू कर दी है। जहां के सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ वहां की आवाम सड़कों पर उतर आई है। छात्र, व्यापारी और महिलाएं पिछले दस दिनों से ईरान के सत्तर शहरों में खामेनेई के विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कहीं कहीं यह प्रदर्शन उग्र हो रुप धारण कर रहा है। प्रदशनकारी खामेनेई के खिलाफ और शाह के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं। इस प्रदर्शन को रोकने खामेनेई सरकार बल प्रयोग कर रही है। जिससे स्थिति विस्फोटक होती जा रही है।

कभी तक झड़प में पच्चीस प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है फिर भी विरोध प्रदर्शन बदस्तूर जारी है। यह अमेरिका के लिए ईरान पर हमला करने का अनुकूल समय है जिसे डोनाल्ड ट्रंप नहीं चूकने वाले हैं। यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि यदि ईरान के लोगों के प्रदर्शन को कुचलने के लिए ईरान सरकार उनकी हत्या करना जारी रखेगी तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और ईरान को सबक सिखाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद जाहिर है कि ईरान में प्रदर्शन और तेज होगा। डोनाल्ड ट्रंप की देखा देखी इजराइल के राष्ट्रपति नेतन्याहू ने भी बयान दिया है कि इजराइल ईरान के प्रदर्शनकारियों के साथ है। इसका मतलब साफ है कि अमेरिका और इजराइल दोनों ईरान में खामेनेई सरकार का तख्ता पलट करने की योजना बना चुके हैं। किंतु ऐसा करना इतना आसान भी नहीं है। ईरान कोई वेनेजुएला नहीं है जहां डोनाल्ड ट्रंप के लिए वहां के राष्ट्रपति को बंधक बनाना चुटकी बजाने जैसा आसान काम साबित हुआ था।

ईरान में खामेनेई के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अमेरिका और इजराइल को मैदानी जंग लडऩी होगी जो कठिन काम है। इसके लिए अगर पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है तो बात अलग है। बहरहाल डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना चुके हैं जो लंबे समय से उनकी आंखों के लिए किरकिरी बना हुआ है। वैसे वेनेजुएला के बाद अमेरिका के निशाने पर कंबोडिया, क्यूबा और ग्रीनलैंड भी हैं किंतु डोनाल्ड ट्रंप पहले ईरान को ही निशाने पर लेंगे इसकी संभावना ज्यादा है।

पिछले साल जब इजराइल और ईरान के बीच जंग छिड़ी थी तब अमेरिका भी इस जंग में कूदा था लेकिन खामेनेई ने हथियार नहीं डाले थे। बाद में अमेरिका की पहल पर ही ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष विराम हुआ था। अब यह सीज फायर कभी भी टूट सकता है और जंग छिड़ सकती है। जो विश्व युद्ध के रुप में तब्दील हो जाए तो कोई ताज्जुब नहीं होगा।

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