बस्तर के जंगलों में दफन ‘लाल आतंक का खजाना, डंप तलाशना अब सबसे बड़ी चुनौती
- करोड़ों की नकदी, किलोभर सोना और हथियारों के सुराग से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
- सरेंडर नक्सलियों की मदद से खुल रहे डंप, लेकिन कई राज जंगलों में अब भी दफन
अनिल सामंत
जगदलपुर/नवप्रदेश। (the Naxalites’ secrets lie hidden in the forests) बस्तर के घने जंगलों में माओवादी संगठन द्वारा वर्षों से छिपाकर रखे गए डंप अब सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों को अलग-अलग अभियानों में करोड़ों रुपए की नकदी, कई किलो सोना और हथियार बरामद हुए हैं। पुलिस का मानना है कि यह बरामदगी केवल एक शुरुआत है और अब भी जंगलों में बड़ी मात्रा में माओवादी संसाधन छिपे हो सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, नक्सल संगठन लंबे समय से लेवी, अवैध वसूली और ठेकेदारों से प्राप्त रकम को जंगलों में गुप्त ठिकानों पर डंप करते रहे हैं।
नक्सलवाद के कमजोर पडऩे और बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण के बाद अब कई पुनर्वासित माओवादी इन डंप की जानकारी सुरक्षा बलों को दे रहे हैं। बस्तर में जारी सर्च ऑपरेशन के दौरान बीते तीन महीनों में कई बड़े खुलासे हुए हैं। नकदी और सोने की बरामदगी ने यह संकेत दिया है कि माओवादी संगठन ने अपनी आर्थिक संरचना को लंबे समय तक व्यवस्थित ढंग से संचालित किया। पुलिस अब इन डंप स्थलों तक पहुंचने के लिए लगातार अंदरूनी इलाकों में अभियान चला रही है।
लेवी का बड़ा काला कारोबार चलता था
जानकारों का कहना है कि माओवादी संगठन की आय का बड़ा हिस्सा तेंदूपत्ता व्यापार, ग्रामीणों से वसूली और विभिन्न ठेकेदारों से मिलने वाली लेवी से आता था। गांवों में सरकारी कर्मचारियों, व्यापारिक गतिविधियों और यहां तक कि स्थानीय खरीद-बिक्री पर भी दबाव बनाकर रकम वसूली जाती थी।
नोटबंदी के बाद नकदी सोने में बदला
सूत्रों के अनुसार, नोटबंदी के बाद संगठन ने बड़ी मात्रा में नकदी को सोने में परिवर्तित कर जंगलों में छिपाना शुरू किया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना कहां से खरीदा गया और उसे किन नेटवर्क के माध्यम से सुरक्षित रखा गया। सुरक्षा बलों के लिए सबसे कठिन पहलू यह है कि कई ऐसे माओवादी, जिन्होंने डंप तैयार किए थे, मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। संगठन में भी डंप की जानकारी सीमित लोगों तक रखी जाती थी। ऐसे में कई गुप्त ठिकाने अब भी जंगलों में दबे होने की आशंका है।
सुरक्षा बलों ने अभियान जारी रखा
इधर, डंप सामग्री की तलाश के दौरान सुरक्षा बलों को लगातार जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। नारायणपुर-कांकेर सीमा पर हाल ही में आईईडी विस्फोट में शहीद हुए जवान भी ऐसे ही एक अभियान में शामिल थे। इसके बावजूद सुरक्षा बलों ने अभियान जारी रखा है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आर्थिक डंप को खोजने पर भी विशेष जोर
अधिकारियों का कहना है कि माओवादी नेटवर्क को आर्थिक रूप से कमजोर करना सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है। इसी कारण अब हथियारों के साथ-साथ आर्थिक डंप को खोजने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि सुरक्षा बल लगातार जंगलों में अभियान चला रहे हैं और आने वाले दिनों में भी विभिन्न डंप स्थलों तक पहुंचने का प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि माओवादी संगठन के फंड फ्लो को पूरी तरह समाप्त करना सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता है।
हाल के अभियानों में क्या-क्या बरामद हुआ
मार्च 2026 में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग अभियानों में लगभग 14 करोड़ रुपए नकद और करीब 7 किलो सोना बरामद किया। मई 2026 में नारायणपुर क्षेत्र से हथियारों और विस्फोटक सामग्री का बड़ा जखीरा जब्त किया गया, जिसमें राइफलें,बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, कारतूस और डेटोनेटर शामिल थे। दंतेवाड़ा के तोडमा क्षेत्र में संयुक्त अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और गोला-बारूद मिले। वहीं फरवरी 2026 में गरियाबंद जिले में 46 लाख रुपए से अधिक नकदी और हथियार बरामद किए गए। कई अभियानों में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की निशानदेही अहम साबित हुई।
वर्जन : – आने वाले समय में भी फोर्स जंगलों के अंदर अभियान जारी रखेगी
बीते कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए कई डंप बरामद किए हैं। इनमें नकदी, सोना और हथियार शामिल हैं। पुनर्वासित माओवादियों की मदद से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। आने वाले समय में भी फोर्स जंगलों के अंदर अभियान जारी रखेगी और माओवादी संगठन के आर्थिक नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। – सुंदरराज पी, आईजी, बस्तर रेंज
