छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ बॉयलर ब्लास्ट अब एक ऐसी त्रासदी बन चुका है, जिसने औद्योगिक सुरक्षा के दावों को राख में मिला (Vedanta Power Plant) दिया है। पिछले 12 घंटों में इलाज के दौरान तीन और श्रमिकों की सांसें थमने के साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या 23 तक जा पहुंची है।
मरने वालों में पश्चिम बंगाल के सुब्रतो जेना और उत्तर प्रदेश के किस्मत अली जैसे मेहनतकश मजदूर शामिल थे, जो घर की तंगहाली दूर करने छत्तीसगढ़ आए थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस फर्नेस को वे सींच रहे हैं, वही उनकी कब्र बन जाएगी।
फर्नेस में बना मौत का दबाव और मैनेजमेंट की चूक (Vedanta Power Plant)
पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों (FSL) की जो शुरुआती रिपोर्ट सामने आई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। जांच में खुलासा हुआ है कि बॉयलर के फर्नेस के भीतर ईंधन (Fuel) का जमाव इस कदर बढ़ गया था कि गैसों का दबाव कंट्रोल से बाहर हो गया।
इस असामान्य प्रेशर की वजह से बॉयलर का निचला हिस्सा किसी कागज की तरह फट गया और पाइप अपनी जगह से उखड़ गए। यह हादसा कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि तकनीकी मानकों की महीनों से की जा रही अनदेखी का नतीजा है। प्लांट में मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही थी, जिसकी भारी कीमत इन बेगुनाह मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
चेयरमैन से लेकर प्लांट हेड तक कानून का शिकंजा
इस सामूहिक मौत के जिम्मेदार अब कानून की जद में हैं। सक्ती पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते (Vedanta Power Plant) हुए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 रसूखदार अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं 106(1), 289 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने इस हाईप्रोफाइल केस के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) तैनात किया है, जो इस बात की परतें खोलेगा कि आखिर किसके इशारे पर सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर प्लांट का संचालन किया जा रहा था।
अपनों को खोने का गम और मुआवजे का मरहम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देते हुए दोषियों पर श्रम कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की बात कही है। मुआवजे की घोषणाएं तो बड़ीबड़ी हुई हैं वेदांता ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और नौकरी देने का वादा किया है,
वहीं केंद्र और राज्य सरकार ने भी राहत राशि का ऐलान (Vedanta Power Plant) किया है। लेकिन अस्पताल के गलियारों में बैठे उन 12 घायलों और मृतकों के परिजनों के लिए ये आंकड़े बेमानी हैं। सक्ती की हवाओं में आज भी उस धमाके की गूंज और अपनों को खोने वाली चीखें शामिल हैं, जो व्यवस्था से सवाल कर रही हैं कि क्या मजदूरों की जान वाकई इतनी सस्ती है?
