अमेरिकी राष्ट्रपति की ताजा चेतावनी ने एक बार फिर दुनिया की निगाहें पश्चिम एशिया की ओर मोड़ (Trump Iran) दी हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यही चर्चा है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव अब पहले से कहीं ज्यादा गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। माहौल ऐसा है कि हर नए बयान को संभावित बड़े घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
लोगों के बीच भी इस बात को लेकर काफी हलचल है कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां बनीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुले तौर पर इतना सख्त संदेश दे दिया। जानकार मान रहे हैं कि यह सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और सुरक्षा चिंताओं का नतीजा है, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है।
हत्या की धमकी पर दिया कड़ा संदेश Trump Iran
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान की ओर से उनकी हत्या या हत्या का कोई प्रयास किया जाता है तो अमेरिका तत्काल जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान पर हजारों मिसाइलें दागी जाएंगी और अमेरिकी सेना इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक यह सैन्य तैयारी लंबे समय तक प्रभावी रहेगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी जारी रखी जा सकती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव अपने चरम पर माना जा रहा है। ट्रंप ने साफ संकेत दिया कि किसी भी हमले का जवाब बेहद सख्ती से दिया जाएगा।
दोनों देशों के बीच दुश्मनी की बड़ी वजहें
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव नया नहीं है। दोनों देशों के रिश्तों में कई घटनाओं ने लगातार तनाव बढ़ाया है। पहला बड़ा कारण ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत से जुड़ी सैन्य कार्रवाई को माना जा रहा है। इसके बाद ईरान के भीतर अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ नाराजगी काफी बढ़ गई।
दूसरा कारण वर्ष 2020 में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में हुई मौत है। उस कार्रवाई के बाद से ट्रंप लगातार ईरान समर्थक समूहों के निशाने पर बताए जाते रहे हैं और कई मौकों पर बदला लेने जैसे नारे भी सामने आए।
तीसरा बड़ा मुद्दा परमाणु समझौते से अमेरिका की वापसी रहा। ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका इस समझौते से अलग हो गया था और ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था और उसके परमाणु कार्यक्रम दोनों पर पड़ा।
तुर्की दौरे में विमान बदलना भी बना चर्चा
हाल ही में नाटो सम्मेलन के लिए तुर्की पहुंचे ट्रंप की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल (Trump Iran) उठे। सम्मेलन में जाने के लिए उन्होंने नया विमान इस्तेमाल किया था, लेकिन अमेरिका लौटते समय पुराने एयर फोर्स वन से वापसी की।
नया विमान अलग एयरबेस भेजे जाने के बाद इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि किसी आधिकारिक बयान में यह स्वीकार नहीं किया गया कि ऐसा सुरक्षा खतरे की वजह से किया गया था। ट्रंप ने इतना जरूर कहा कि ईरान की नजर में वह सबसे बड़े निशाने पर हैं। इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।
क्या दुश्मन को भ्रमित करने की थी रणनीति
अमेरिकी प्रशासन की ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए कई स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू रहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि संभावित खतरे की स्थिति में दुश्मन को भ्रमित करने वाली रणनीतियां भी अपनाई जाती हैं ताकि किसी भी जोखिम को कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान विमान बदलना भी ऐसी ही सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ईरान की सैन्य क्षमता कितनी
ईरान के पास कई ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं जिनकी मारक क्षमता दो हजार से तीन हजार किलोमीटर तक बताई जाती है। इनमें लंबी दूरी की मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन शामिल हैं जो क्षेत्रीय स्तर पर बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।
हालांकि उपलब्ध सैन्य आकलनों के अनुसार ईरान के पास ऐसी मिसाइलें (Trump Iran) नहीं हैं जो सीधे अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुंच सकें। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि हालात बातचीत की ओर बढ़ते हैं या फिर टकराव और गहरा होता है।
