महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में शुक्रवार सुबह उस समय अफरा तफरी (Tiger Attack) मच गई, जब तेंदू पत्ता तोड़ने जंगल गई महिलाओं के समूह पर अचानक बाघ ने हमला कर दिया। जंगल के भीतर से चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग सहम गए। गांव में घटना की खबर पहुंचते ही लोगों में डर और बेचैनी फैल गई। कई परिवार अपने लोगों की तलाश में जंगल की ओर दौड़ पड़े।
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के किनारे रहने वाले लोग रोजी रोटी के लिए वन उत्पादों पर निर्भर हैं, लेकिन अब जंगल में जाना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है। हमले के बाद गांवों में लोगों की भीड़ जमा रही और हर तरफ इसी घटना की चर्चा होती रही।
तेंदू पत्ता इकट्ठा करने गई थीं महिलाएं : Tiger Attack
जानकारी के अनुसार सिंदेवाही तालुका के गुंजेवाही पवनपार गांव के पास शुक्रवार सुबह 13 महिलाओं का समूह जंगल पहुंचा था। इसी दौरान एक बाघ ने अचानक हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि महिलाओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
चार महिलाओं की मौके पर मौत
इस हमले में 45 वर्षीय कवदूबाई दादाजी मोहुर्ले, 46 वर्षीय अनुबाई दादाजी मोहुर्ले, 36 वर्षीय संगीता संतोष चौधरी और 33 वर्षीय सुनीता कौशिक मोहुर्ले की जान चली गई। मृतकों में तीन महिलाएं एक ही परिवार की बताई जा रही हैं। बाकी महिलाओं ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई और मदद के लिए आवाज लगाई।
वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके (Tiger Attack) पर पहुंचे। सिंदेवाही वन रेंज की अधिकारी अंजली सायंकर ने हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से फिलहाल घने जंगलों में नहीं जाने की अपील की है। इलाके में लगातार गश्त भी बढ़ा दी गई है।
बढ़ रही मानव वन्यजीव संघर्ष की चिंता
इस घटना के बाद चंद्रपुर जिले में मानव और वन्यजीव संघर्ष को लेकर चिंता और बढ़ गई है। वन क्षेत्रों के आसपास मानवीय गतिविधियां बढ़ने और जंगलों के दायरे घटने से ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताडोबा अंधारी बाघ अभ्यारण्य वाला यह इलाका बाघों की बड़ी संख्या के लिए जाना जाता है।
इस साल कई लोगों की जा चुकी जान
जानकारी के मुताबिक जनवरी 2026 से अब तक इस तरह की घटनाओं में 19 लोगों की मौत हो चुकी (Tiger Attack) है। वहीं पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र में मानव और वन्यजीव संघर्ष से 450 से ज्यादा लोगों की जान गई है। लगातार बढ़ती घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल बना दिया है।
