संपादकीय: बंगाल में बंपर वोटिंग के मायने

Editorial: बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए हुए पहले चरण के मतदान में वहां के मतदाताओं ने इस प्रचंड गर्मी के बाद भी जिस तरह बढ़चढ़कर मतदान किया है उससे आजदी के बाद बंगाल में अब तक हुए मतदान का रिकॉर्ड टूट गया है। बंगाल में पहली बार 92 प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़े हैं। वोटों की ऐसी सुनामी इसके पहले 2011 में आई थी जब ममता बनर्जी की नवगठित पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने वहां दशकों से सत्ता पर काबिज वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंका था इस बार तो 2011 के मतदान का भी रिकॉर्ड पीछे छूट गया है।

अब इस बंपर वोटिंग को लेकर सब अपने अपने ढंग से इसके मायने निकाल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी इसे परिवर्तन का तूफान बता रही है और दूसरी ओर टीएमसी सुप्रीमों तथा बंगाल की निवृतमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि पहले चरण का जो भारी मतदान हुआ है। वह बदलाव का नहीं बल्कि बदले का प्रतिक है और वे चौथी बार भारी बहुमत से अपनी सरकार बनाने जा रही है। टीएमसी के सांसद डेरेक ओब्रायन ने भी दावा किया है कि पहले चरण की बंपर वोटिंग टीएमसी के पक्ष में गई है और बंगाल में फिर से टीएमसी की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दी है कि यदि बंगाल में फिर से भाजपा हारती है तो क्या पीएम मोदी अपने पद से इस्तीफा देंगे।

दूसरी तरफ भाजपा के नेता और ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लडऩे वाले शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि पहले चरण के मतदान में बंगाल के लोगों ने टीएमसी के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में मतदान किया है और जिन 152 सीटों पर मतदान हुआ है उसमें से 125 सीटें भाजपा जीतने जा रही है। कुल मिलाकर इस बंपर वोटिंग को लेकर सब अपनी अपनी ढफली पर अपना अपना राग अलाप रहे हैं। इस बंपर वोटिंग का असली मायने तो 4 मई को पता चलेगा जब ईवीएम का मुंह खुलेगा। वैसे तो अवसत से ज्यादा मतदान होना मौजूदा सरकार के खिलाफ एंटिइंकमबेन्सी का ही परिणाम माना जाता रहा है इस लिहाज से देंखे तो ममता बनर्जी के लिए पहले चरण में वोटों की सुनामी आना चिंता का विषय है। अब दूसरे चरण का मतदान 29 अपैल को होगा जिसके लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के और कड़े इंतेजाम किये हैं।

पहले चरण के मतदान में सुरक्षा के चाकचौबंध इंतेजाम होने के बावजूद कहीं कहीं अप्रिय स्थिति निर्मित हुई थी। कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी शुभेंदू सरकार के साथ टीएमसी के गुंडों ने मारपीट की थी जिसके चलते उन्हें अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा था। इसी तरह आसनसोल दक्षिण से भाजपा के उम्मीदवार अग्रि मित्र पाल पर भी टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने पत्थरबाजी की थी। टीएमसी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने वाले हुमांयू कबीर के खिलाफ भी टीमएसी समर्थकों ने उग्र प्रदर्शन किया था और उनके साथ भी बदसलूकी की गई थी।

इन तमाम घटनाओं को गंभीरता से लेकर चुनाव आयोग ने कड़ी कार्यवाही की है और गुंडागर्दी करके मतदान को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले लगभग 150 टीमएसी समर्थकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और अब उनके खिलाफ एनएसए के तहत कार्यवाही करने की भी तैयारी की जा रही है। इन छिटपूट हिंसक घटनाओं को छोड़ दें तो पहले चरण का मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्वक हुआ है और इसके लिए चुनाव आयोग तथा केन्द्रीय सुरक्षा बल के मुस्तैद जवान बधाई के पात्र हैं जिन्होंने मतदाताओं की सुरक्षा की पूरी गारंटी दी थी उसी का यह सुपरिणाम निकला की टीएमसी के गुंडों की धमकी चमकी के बावजूद इतनी भारी संख्या में बंगाल के लोग मतदान के लिए बेखौफ होकर निकले।

नतीजतन पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार दस प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ और बंगाल में ऐतिहासिक मतदान का रिकॉर्ड कायम कर दिया। उम्मीद की जा रही है कि दूसरे चरण के मतदान में भी बंगाल के मतदाता बढ़ चढ़कर अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। पहले चरण के शांतिपूर्ण मतदान के बाद अब उनका हौसला और बुलंद हो गया होगा। इसलिए कोई बड़ी बात नहीं थी दूसरे चरण के मतदान में और अधिक मत पड़े और पहले चरण के मतदान का भी रिकॉर्ड टूट जाये इसके लिए चुनाव आयोग को और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है क्योंकि दूसरे चरण के चुनाव में कुछ अतिसंवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदान भी होना है जहां अप्रिय स्थिति निर्मित होने की आशंका है। उम्मीद की जानी चाहिए कि केन्द्रीय सुरक्षाबल के जवान और मुस्तैदी दिखाएंगे तथा दूसरे चरण का मतदान भी शांतिपूर्वक संपन्न हो जाएगा।

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