राज्यसभा चुनाव से जुड़े चर्चित विवाद में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने (Supreme Court) आया। सुबह से ही राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज था और सभी की नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई थीं। जैसे ही फैसला सामने आया, सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल बढ़ गई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मामले का असर केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में इसकी गूंज राजनीतिक मंचों पर भी सुनाई दे सकती है। अदालत के फैसले के बाद अब विपक्षी दलों की अगली रणनीति पर भी सबकी नजर है।
अदालत ने याचिका खारिज की : Supreme Court
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को नामांकन विवाद मामले में राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। नटराजन ने अपने नामांकन को निरस्त किए जाने और चुनाव आयोग की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई में रखे गए कई तर्क
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा है और उसमें आरोप तय नहीं किए गए हैं। उनका कहना था कि जब तक आरोप तय नहीं होते, तब तक उम्मीदवार के लिए उस जानकारी को नामांकन में दर्ज करना आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि केवल नोटिस जारी होना और संज्ञान लिया जाना अलग अलग बातें हैं तथा इस मामले में आरोप तय होने जैसी स्थिति मौजूद नहीं थी।
चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष
चुनाव आयोग की ओर से अदालत में कहा गया कि आयोग के पास हस्तक्षेप करने का अधिकार (Supreme Court) नहीं था और रिटर्निंग अधिकारी ने कानून के प्रावधानों के अनुसार ही कार्रवाई की। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई है।
क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने नामांकन पत्र में एक लंबित आपराधिक मामले की जानकारी दर्ज नहीं की। बताया गया कि हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले का उल्लेख नामांकन दस्तावेजों में नहीं किया गया था। इसी आधार पर उनके नामांकन को निरस्त कर दिया गया।
निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता हुआ साफ
नामांकन रद्द होने के बाद चुनावी मुकाबला समाप्त हो गया और भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग साफ हो गया। इस घटनाक्रम के बाद महेश केवट सहित तीनों उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया गया।
विरोध की तैयारी में कांग्रेस
मामले को लेकर कांग्रेस लगातार आपत्ति (Supreme Court) जता रही है। पार्टी का कहना है कि उम्मीदवारों को विजयी घोषित करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार होना चाहिए था। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मिलने का समय भी मांगा है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पार्टी अपने विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने की तैयारी भी कर रही है और इस मामले को सार्वजनिक स्तर पर उठाने की रणनीति बना रही है।
मीनाक्षी नटराजन ने दिया जवाब
फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि मामला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है, इसलिए वह कानूनी पहलुओं पर विस्तृत टिप्पणी नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन पर जानकारी छिपाने का जो आरोप लगाया गया है, वह सही नहीं है और किसी प्रकार की जानकारी नहीं छिपाई गई थी।
