Editorial : छात्रों की गुहार सुने सोरेन सरकार

Soren Government Should Heed Students’ Plea: नीट पेपर लीक मामले को लेकर नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को लेकर जो गलती केन्द्र सरकार ने की थी उसी गलती को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी दोहरा दिया है। जिस तरह नई दिल्ली में 13 दिनों के आंदोलन के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपना आपा खोया था और संसद को घेरने निकल पड़े थे। नतीजतन उनके लिए लाठीचार्ज करना पड़ा था। रांची में भी वही हुआ। 17 दिनों तक वहां छात्र धरना प्रदर्शन करते रहे लेकिन उनकी मांगो पर झारखंड सरकार ने ध्यान नहीं दिया। फलस्वरूप वहां भी छात्रों ने विधानसभा का घेराव करने का फैसला किया और उनपर भी पुलिस की लाठियां बरसी।

यह ठीक है कि किसी भी संगठन को प्रदर्शन के नाम पर संसद या विधानसभा जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने की अनुमति नहीं दी जाती और जो ऐसा करने की कोशिश करते हैं उनके खिलाफ पुलिस बल प्रयोग करती ही है। यदि जिस तरह नई दिल्ली में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धमेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था उससे सबक लेकर झारखंड सरकार यदि पहले ही छात्रों की गुहार सुन लेती तो वहां भी विधानसभा घेराव और छात्रों पर लाठीचार्ज की नौबत नहीं आती।

हेमन्त सोरेन सरकार को चाहिए कि वह अब भी स्थिति को संभालने के लिए छात्रों की गुहार को सुने। वहां के छात्र किसी मंत्री का इस्तीफा तो नहीं मांग रहे हैं। वे बस इतना चाहते हैं कि झारखंड लोकसेवा आयोग तथा झारखंड राज्य कर्मचारी आयोग द्वारा अयोजित परिक्षाओं में जो गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं उसकी सीबीआई से जांच कराई जाये किन्तु सोरेन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। उसने मामले की सीआईडी जांच के आदेश दिये हैं लेकिन छात्रों को राज्य सरकार के अधिन रहने वाली सीआईडी की जांच पर भरोसा नहीं है।

यही वजह है कि वे आंदोलित हैं। लाठीचार्ज की घटना के बाद भी छात्रों ने अपना आंदोलन जारी रखा है अब इस मामले में भाजपा भी छात्रों के समर्थन में उतर गई है। भाजपा ने छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ एक द्विवसीय झारखंड बंद भी अयोजित किया। ईधर संसद में भी एनडीए के घटक दलों ने झारखंड में छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बर कार्यवाही को लेकर संसद परिसर में नारेबाजी की।

एनडीए के सांसदो ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना को लेकर राहुल गांधी लगातार संसद की कार्यवाही बाधित करवा रहे हैं लेकिन रांची के छात्रों पर जो लीठीचार्ज हुआ है उसकी वे सिर्फ एक लाइन में निंनदा करके अपने कत्वर्य की इतिश्री कर रहे हैं।

अब तो सरकार राहुल गांधी के हर आरोपों का जवाब देने के लिए तैयार है लेकिन वे खुद चर्चा से भाग रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली में हुए लाठीचार्ज और झारखंड में हुए लाठीचार्ज को लेकर भी संसद में बयान देंगे। लेकिन यह बयान विपक्ष से सुना नहीं जाएगा क्योंकि झारखंड में उनकी सरकार है। कुल मिलाकर झारखंड सरकार ने छात्रों पर लाठीचार्ज करा के इंडी गठबंधन को बैकफूट पर ला दिया है और भाजपा को आक्रामक होने का मौका दे दिया है। इसके पहले कि पानी सिर से ऊंचा हो जाये झारखंड सरकार को आंदोलित छात्रों से चर्चा करके समस्या का समाधान करना चाहिए।

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