छत्तीसगढ़ की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर सामने (Slum Development) आई है। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे इलाकों में अब बदलाव की शुरुआत होने जा रही है। सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिससे स्लम बस्तियों और पुराने सरकारी आवासों में रहने वाले लोगों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
शहरों की पुरानी बस्तियों में रहने वाले लोगों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है। अब नगर निकायों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि गरीबों के लिए जमा सेवा निधि की राशि का उपयोग उन्हीं क्षेत्रों में किया जाए, जहां लोगों को मूलभूत सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। सरकार का फोकस रहने की बेहतर व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर रहेगा।
सेवा निधि से होंगे विकास कार्य Slum Development
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों के आयुक्त और नगर पालिकाओं के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र की स्लम और पुरानी झुग्गी बस्तियों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य शुरू करने होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सेवा निधि की राशि का उपयोग सीधे गरीब परिवारों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय निकायों को समयबद्ध तरीके से कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इन सुविधाओं पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
निर्देशों के अनुसार जिन सरकारी आवासों में गरीब परिवारों को बसाया गया है, वहां नियमित रखरखाव किया जाएगा। शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जलभराव जैसी समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा।
इसके अलावा स्लम बस्तियों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, मरम्मत और नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
पुराने सरकारी आवासों का होगा कायाकल्प
सरकार ने यह भी तय किया है कि सेवा निधि का बड़ा हिस्सा आईएचएसडीपी, बीएसयूपी और अन्य पुरानी शासकीय आवासीय योजनाओं के तहत बने मकानों के रखरखाव और उन्नयन पर खर्च (Slum Development) किया जाएगा। इस राशि से जर्जर भवनों की मरम्मत, आवश्यक सुविधाओं का विस्तार और रहने योग्य वातावरण तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
नियमों के तहत होगा फंड का उपयोग
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सेवा निधि का उपयोग छत्तीसगढ़ नगरपालिका निगम अधिनियम 1956 और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 में किए गए कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही किया जाएगा। कॉलोनाइजरों से गरीबों की सेवा निधि मद में जमा राशि केवल गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने वाले कार्यों पर ही खर्च की जा सकेगी।
गड़बड़ी मिलने पर तय होगी जवाबदेही
राज्य शासन ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि सेवा निधि के उपयोग में किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सरकार ने सभी नगरीय निकायों को पारदर्शिता के साथ राशि खर्च करने और तय दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश (Slum Development) दिए हैं।
