मुंबई में आज राजनीतिक माहौल कुछ अलग नजर (Shiv Sena Crisis) आ रहा है। शहर के कई इलाकों में बड़े बड़े बैनर और पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। शिवसेना के स्थापना दिवस के मौके पर दोनों गुट अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं, लेकिन इसके साथ ही आरोप प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
सड़क से लेकर राजनीतिक मंचों तक हर जगह एक ही चर्चा है कि आखिर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का अगला पड़ाव क्या होगा। बगावत, दावे और पोस्टर वार के बीच शिवसैनिकों की नजर आज होने वाले दोनों बड़े कार्यक्रमों पर टिकी हुई है।
पोस्टर वार से गरमाया माहौल : Shiv Sena Crisis
शिवसेना के स्थापना दिवस से पहले मुंबई में दोनों गुटों के बीच पोस्टर युद्ध खुलकर सामने आ गया है। उद्धव ठाकरे गुट ने कई स्थानों पर ऐसे पोस्टर लगाए हैं जिनमें बागी नेताओं पर निशाना साधा गया है।
पोस्टरों में दावा किया गया है कि चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन विचारधारा नहीं बदलती। साथ ही यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि शिवसेना की मूल पहचान और विचार आज भी कायम हैं।
श्रीकांत शिंदे ने जारी किया टीजर
उधर सांसद श्रीकांत शिंदे ने स्थापना दिवस को लेकर एक विशेष टीजर जारी किया है। इसमें दावा किया गया है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ही वास्तविक शिवसेना है।
टीजर के जरिए कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि संगठन में सभी की भूमिका समान है और पार्टी बालासाहेब ठाकरे के विचारों के अनुरूप आगे बढ़ रही है।
आज होंगे दो बड़े समारोह
शिवसेना के दोनों गुट आज अलग अलग स्थानों पर स्थापना दिवस कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में एकनाथ शिंदे गुट का कार्यक्रम रखा गया है, जहां पार्टी के विधायक, मंत्री और सांसद मौजूद रहेंगे।
वहीं दूसरी ओर सायन माटुंगा के शणमुखानंद सभागार में उद्धव ठाकरे अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी पर भी सबकी नजर (Shiv Sena Crisis) बनी हुई है।
विधायकों और सांसदों को लेकर दावे
राजनीतिक हलकों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा विधायकों और सांसदों की संख्या को लेकर हो रही है। शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव ठाकरे गुट के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और भविष्य में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। दूसरी तरफ उद्धव गुट के सांसदों की हालिया गतिविधियों ने भी सियासी अटकलों को हवा दी है। यही वजह है कि दोनों पक्ष लगातार अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाने में जुटे हुए हैं।
सुरक्षा बढ़ने से और बढ़ी चर्चा
बागी सांसदों को लेकर चल रहे विवाद के बीच उनकी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद महाराष्ट्र पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि कुछ सांसदों को दूसरे शहर में स्थानांतरित किया गया है। हालांकि राजनीतिक बयानबाजी और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला अभी भी जारी है।
पुलिस भी सतर्क
दोनों गुटों के बीच बढ़ते तनाव और राजनीतिक गतिविधियों को देखते (Shiv Sena Crisis) हुए मुंबई पुलिस पूरी तरह सतर्क है। शहर के विभिन्न इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। स्थापना दिवस के मौके पर होने वाले दोनों कार्यक्रमों पर अब पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि आने वाले दिनों की राजनीति की दिशा काफी हद तक इन्हीं घटनाक्रमों से तय हो सकती है।
