SBI Research: लगेगा बड़ा झटका: SBI के शोध का दावा- दिसंबर में RBI रेपो दर में कर सकता है भारी बढ़ोतरी

SBI Research: EMI चुकाने वाले ग्राहकों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होने वाली

मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक (SBI Research) द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की हालिया बढ़ोतरी के बाद वर्तमान ब्याज दर 5.50 प्रतिशत हो गई है। लेकिन आवास ऋण (होम लोन) और वाहन ऋण (ऑटो लोन) की मासिक किस्त चुकाने वाले ग्राहकों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होने वाली हैं। भारतीय स्टेट बैंक के शोध की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह तो महज शुरुआत है; असली झटका दिसंबर की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लग सकता है।

दिसंबर में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की प्रबल संभावना

भारतीय स्टेट बैंक (SBI Research) के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक हालात जल्द ही अस्थिर हो सकते हैं। इसे देखते हुए रिपोर्ट का सुझाव है कि रिज़र्व बैंक को ब्याज दरों में छोटी-छोटी बढ़ोतरी करने के बजाय एक साथ 50 आधार अंकों की बड़ी बढ़ोतरी करनी चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में रेपो दर को 6% पर तय कर देना अर्थव्यवस्था के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।

रिज़र्व बैंक का रुख अब हुआ सख्त

अक्टूबर की नीतिगत बैठक के विश्लेषण से यह साफ हो गया है कि रिज़र्व बैंक (SBI Research) अब सिर्फ सावधानी बरतने की नीति पर नहीं चल रहा है, बल्कि उसका रुख मौद्रिक सख्ती की ओर पूरी तरह से झुक चुका है। केंद्रीय बैंक ने खुदरा महंगाई के अपने अनुमान को 20 आधार अंक बढ़ाकर 5.20% कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज दर में बढ़ोतरी की रफ्तार सीधे तौर पर महंगाई के दबाव और उसकी तेजी पर निर्भर करेगी।

रुपये में गिरावट और विदेशी पूंजी प्रवाह की चिंता

ब्याज दरों और महंगाई के अलावा, अर्थव्यवस्था के सामने दो अन्य बड़ी चुनौतियां भी हैं:

रुपये को बचाने की दरकार: भारतीय रुपया अब चिंताजनक स्तर की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में रुपये की कीमत स्थिर रखने के लिए जल्द से जल्द बचाव के कदम उठाने की सलाह दी गई है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति और निवेश: भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह को आसान और सुव्यवस्थित बनाने के लिए एक स्पष्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) नीति की सख्त जरूरत है। नीतिगत स्पष्टता के बिना बड़े निवेश के प्रभावित होने की पूरी संभावना है।

आपकी जेब पर क्या होगा असर?

अगर दिसंबर में रिज़र्व बैंक (SBI Research) रेपो दर को बढ़ाकर 6% तक ले जाता है, तो बैंकों की कर्ज देने की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। आवास ऋण, वाहन ऋण और व्यक्तिगत ऋण की ब्याज दरें महंगी हो जाएंगी, जिसके चलते ग्राहकों की मासिक किस्त में भारी उछाल आना तय है। जिन लोगों के ऋण परिवर्तनशील दर (फ्लोटिंग रेट) पर चल रहे हैं, उनके ऋण की अवधि या मासिक किस्त की रकम दोनों में इजाफा हो सकता है।

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