RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat: हर बात का तार्किक जवाब चाहते हैं युवा
जेन-जी और जेन-अल्फा राष्ट्र की असली ताकत
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत (RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat) ने मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित ‘इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस‘ सम्मेलन के 15वें वर्षगांठ समारोह में शिरकत की। इस भव्य कार्यक्रम में देश-विदेश से आए करीब 2,000 छात्रों और युवाओं के बीच उन्होंने लोकतंत्र, विरोध प्रदर्शनों, शिक्षा के व्यवसायीकरण, रोजगार के नए विकल्पों और आज की युवा पीढ़ी की बदलती सोच जैसे बेहद गंभीर, प्रासंगिक और समकालीन मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों को लेकर युवाओं के मुखर होने और लगातार चल रही बहसों के बीच संघ प्रमुख का यह संबोधन बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज की युवा पीढ़ी—विशेषकर जेन-जी और जेन-अल्फा—पुरानी पीढ़ी से अधिक ईमानदार और देशभक्त है। उन्होंने युवाओं के आंदोलन और सवाल पूछने की प्रवृत्ति को न सिर्फ जायज ठहराया, बल्कि इसे देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक सकारात्मक बदलाव करार दिया।
जेन-जी की देशभक्ति और ईमानदारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत (RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat) के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी (विशेषकर जेन-जी और जेन-अल्फा) को लेकर जो आम धारणाएं हैं, वास्तविकता उससे अलग है। यह युवा पीढ़ी पुरानी पीढिय़ों की तुलना में कहीं अधिक ईमानदार, देशभक्त और देश के प्रति जवाबदेह है। इनकी सोच को नकारात्मक मानने के बजाय इनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने की आवश्यकता है।
संवाद की कमी और आंदोलनों
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए लंबे आंदोलनों का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने माना कि यह स्थिति सरकार और युवाओं के बीच संवादहीनता या बातचीत की कमी के कारण उत्पन्न हुई। यदि समय रहते नीति निर्माताओं और युवाओं के बीच पारदर्शी संवाद स्थापित हो जाता, तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।
आंदोलन करने का लोकतांत्रिक अधिकार
युवाओं द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन या आंदोलन करना किसी भी स्थिति में राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जा सकता। लोकतंत्र के दायरे में रहकर अपनी बात को मुखरता से रखना और संवाद शुरू करना नागरिकों का वैध अधिकार है, बशर्ते यह प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक मार्ग पर चले।
युवाओं की तार्किक सोच और सवाल पूछने की प्रवृत्ति
पहले के समय में बड़े-बुजुर्गों की बात बिना किसी सवाल के मान ली जाती थी, लेकिन आज का युवा हर विषय पर तार्किक, वैज्ञानिक और तथ्य आधारित जवाब चाहता है। इस प्रवृत्ति को दबाने या चुप कराने के बजाय बुजुर्गों और समाज को उनकी बातों को गंभीरता से सुनना और समझना चाहिए।
शिक्षा का व्यवसायीकरण और उसकी सुलभता
शिक्षा प्रणाली पर गहरी चिंता जताते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा कोई कमर्शियल बिजनेस या मुनाफा कमाने का साधन नहीं है। देश के हर वर्ग, हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आसानी से पहुंचे, इसके लिए सरकार के साथ-साथ पूरे समाज और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर ठोस बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा।
रोजगार और उद्यमिता पर जोर
आजीविका के लिए केवल सरकारी या प्राइवेट नौकरियों पर निर्भर रहने की मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है। युवाओं को स्वरोजगार अपनाने और नए व्यावसायिक अवसर (स्टार्टअप्स) सृजित करने की दिशा में आगे बढऩा चाहिए, जिससे वे न केवल खुद आत्मनिर्भर बनें बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे सकें।
पाकिस्तान और चीन के साथ कूटनीतिक रुख
देश की सुरक्षा और विदेश नीति पर बात करते (RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat) हुए यह कहा गया कि जब भी राष्ट्र पर संकट या युद्ध की स्थिति हो, तब पूरे देश को एकजुट होकर सरकार का साथ देना चाहिए। हालांकि, युद्ध या तनाव की स्थिति हमेशा स्थायी नहीं होती, इसलिए संघर्ष समाप्त होने के बाद कूटनीतिक बातचीत के रास्ते हमेशा खुले रखे जाने चाहिए।
महिलाओं का नेतृत्व और समान अधिकार
भारतीय समाज और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए यह समर्थन किया गया कि देश और समाज के विकास के लिए महिलाओं का नेतृत्व में आगे आना अनिवार्य है। उन्हें हर क्षेत्र में बराबरी का हक और समान अधिकार मिलने ही चाहिए।
