RBI Mission Saksham : अब नहीं डूबेंगे सहकारी बैंकों में आपके पैसे, RBI ने लांच किया मिशन सक्षम

भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के सहकारी बैंकिंग ढांचे को नई संजीवनी देने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है। ‘मिशन सक्षम’ के नाम से शुरू किए गए इस अभियान का सीधा असर आपके शहर और मोहल्ले के उन सहकारी बैंकों पर पड़ेगा जहां आम आदमी अपनी जमा पूंजी रखता है।

मंगलवार को जब आरबीआइ ने इस मिशन का ऐलान किया तो बैंकिंग जगत में इसे एक बड़े सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मकसद केवल बैंकों को तकनीक से जोड़ना नहीं है बल्कि उन हाथों को भी मजबूत करना है जो इन बैंकों को चलाते हैं ताकि ग्राहकों का भरोसा और ज्यादा गहरा हो सके।

इस विशेष अभियान के तहत देश भर के शहरी को-आपरेटिव बैंकों में काम करने वाले करीब 1.40 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का विशाल लक्ष्य रखा गया है। रिजर्व बैंक का मानना है कि सहकारी बैंकों की सबसे बड़ी कमजोरी अक्सर प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की कमी रही है जिसे अब ‘मिशन सक्षम’ के जरिए दूर किया जाएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बैंकों के बड़े अधिकारियों से लेकर आइटी एक्सपर्ट्स तक को शामिल किया गया है ताकि बैंकिंग का पूरा ढांचा ही बदल जाए। यहां गांव से लेकर शहर तक फैले सहकारी बैंकों के भविष्य को सुरक्षित करने की तैयारी की जा रही है।

सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की क्षमता में होगा बड़ा इजाफा

आरबीआइ ने मंगलवार को शहरी कोआपरेटिव बैंकों यानी सहकारी बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए मिशन सक्षम की शुरुआत की है। यह पूरे देश में लागू होने वाला एक प्रशिक्षण और क्षमता विनिर्माण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य को-आपरेटिव बैंकों की कार्यक्षमता और प्रबंधन को बेहतर बनाना है। इस कदम से बैंकों के काम करने के तरीके में बड़ी पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

1.40 लाख कर्मचारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

आरबीआइ द्वारा शुरू किए गए इस मिशन के तहत करीब 1.40 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसमें बैंकों के बोर्ड सदस्य सीनियर मैनेजर और आडिट विभागों के प्रमुखों के साथ-साथ आइटी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। रिजर्व बैंक का यह डिजिटल और जमीनी प्रयास बैंकों की अंदरूनी व्यवस्था को और भी ज्यादा दुरुस्त कर देगा।

आफलाइन और आनलाइन मोड में होगी ट्रेनिंग

यह ट्रेनिंग प्रोग्राम आफलाइन और आनलाइन दोनों तरह से आयोजित किए जाएंगे जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके। आरबीआइ का मानना है कि इस पहल से सहकारी बैंकों के प्रबंधन की क्षमता और परिचालन दक्षता में सुधार होगा। आने वाले समय में इसका सीधा लाभ खाताधारकों को मिलेगा क्योंकि बैंक अब अधिक पेशेवर तरीके से काम कर सकेंगे।

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