संसद परिसर में सोमवार को सार्वजनिक परीक्षाओं को लेकर हलचल (Paper Leak Bill) तेज रही। पेपर लीक रोकने के लिए सरकार नया संशोधन विधेयक लेकर आई तो राजनीतिक गलियारों से लेकर छात्रों के बीच भी इसकी चर्चा शुरू हो गई। सबसे ज्यादा सवाल इस बात पर उठे कि शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे प्रह्लाद जोशी की जगह आखिर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक लोकसभा में क्यों पेश किया।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही इस मुद्दे पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया। सोशल मीडिया पर भी तरह तरह के दावे किए जाने लगे। इसी बीच सरकार की ओर से साफ किया गया कि इसके पीछे प्रशासनिक और विभागीय जिम्मेदारियों से जुड़ी स्पष्ट वजहें हैं, जिनके चलते यह जिम्मेदारी डॉ. जितेंद्र सिंह को दी गई।
जितेंद्र सिंह ने ही क्यों पेश किया संशोधन विधेयक Paper Leak Bill
सरकार का यह कानून केवल एनटीए की परीक्षाओं जैसे नीट, जेईई और सीयूईटी तक सीमित नहीं है। इसका दायरा संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती, बैंकिंग और अन्य केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं तक फैला हुआ है। इन परीक्षाओं से जुड़ा काम कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अंतर्गत आता है, जिसकी जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह संभाल रहे हैं।
यही वजह है कि वर्ष 2024 में जब मूल एंटी पेपर लीक कानून संसद में लाया (Paper Leak Bill) गया था तब भी इसे डॉ. जितेंद्र सिंह ने ही पेश किया था। अब उसी कानून में संशोधन लाने वाला विधेयक भी उन्होंने ही सदन में रखा।
प्रह्लाद जोशी के पास थी दूसरी अहम जिम्मेदारी
हाल ही में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जिस दिन संशोधन विधेयक पेश किया गया, उस दिन लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय से जुड़े प्रश्नकाल और अन्य संसदीय तैयारियों की जिम्मेदारी भी उनके पास थी। इसी कारण सरकार ने विधेयक पेश करने का दायित्व डॉ. जितेंद्र सिंह को सौंपा, क्योंकि संबंधित विभाग और पहले के कानून की जिम्मेदारी भी उनके पास रही है।
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाल चुके हैं प्रह्लाद जोशी Paper Leak Bill
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी (Paper Leak Bill) को दिया। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने और स्कूलों के नए पाठ्यक्रम पर तेजी से काम चल रहा है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास करेंगे।
हाई पावर टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक व्यवस्था पर भी सरकार सक्रिय
सरकार ने पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्ती बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था शुरू की गई है। साथ ही नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई पावर टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है।
इसी क्रम में सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने के लिए संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया। हालांकि विपक्ष के विरोध के चलते इस पर विस्तृत चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी।
हंगामे के कारण बार बार स्थगित होती रही कार्यवाही
डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोपहर में सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश किया, लेकिन विपक्ष छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर पहले चर्चा कराने की मांग (Paper Leak Bill) पर अड़ा रहा।
स्थिति को देखते हुए सदन की कार्यवाही पहले दोपहर तक, फिर दो बजे तक और बाद में शाम पांच बजे तक स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों को आपसी सहमति बनाने के लिए तीन घंटे का समय भी दिया।
धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया भी आई सामने
केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया भी सामने (Paper Leak Bill) आई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बयान पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वह मैदान में संघर्ष करने वाले व्यक्ति हैं, केवल कमरे में बैठकर राजनीति करने वाले नहीं।
