बिलासपुर में धान खरीदी से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार (Paddy Scam) कर दिया है। सहकारी समिति में लाखों रुपये की धान और बारदानों की कमी को लेकर दर्ज मामले में प्रबंधक की ओर से कई कारण बताए गए, लेकिन अदालत ने फिलहाल इन्हें स्वीकार नहीं किया। अदालत का मानना है कि पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। धान की कमी के पीछे प्राकृतिक कारण हैं या फिर लापरवाही अथवा गबन, इसका फैसला अब जांच रिपोर्ट के आधार पर होगा।
लाखों रुपये की धान की कमी का मामला : Paddy Scam
दुर्ग जिले के कुम्हाली स्थित सेवा सहकारी समिति में धान और बारदानों की बड़ी कमी पाए जाने के बाद मामला दर्ज किया गया था। भौतिक सत्यापन के दौरान 690.70 क्विंटल धान और 3057 बारदानों की कमी सामने आई थी। इसकी अनुमानित कीमत 23.54 लाख रुपये बताई गई है।
प्रबंधक ने दिए ये तर्क
समिति प्रबंधक ने अदालत में दावा किया कि धान की कमी किसी आपराधिक मंशा का परिणाम नहीं है। उनके अनुसार धान में नमी कम होने से वजन घटा, लंबे समय तक भंडारण के कारण कीटों और चूहों से नुकसान हुआ तथा जर्जर बारदानों की वजह से भी अनाज का रिसाव हुआ।
हाईकोर्ट ने कहा, जांच से सामने आएगी सच्चाई
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की खंडपीठ ने कहा कि यह जांच का विषय है कि कमी प्राकृतिक कारणों से हुई या फिर इसमें लापरवाही अथवा गबन की भूमिका (Paddy Scam) है। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
एफआईआर रद्द करने से किया इनकार
याचिकाकर्ता ने एफआईआर निरस्त करने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शुरुआती चरण में आपराधिक जांच को रोकना उचित नहीं होगा।
जमानत के लिए खुला रास्ता
हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि वह कानून के तहत अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र (Paddy Scam) है। मामले की आगे की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा जारी रहेगी।
