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संपादकीय: राबड़ी निवास खाली करने का आदेश

Order to vacate Rabri residence

Editorial: बिहार में प्रचंड बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनने के बाद अब नीतीश कुमार सरकार ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। बिहार सरकार के नये मंत्रियों और पहली बार चुनकर आये विधायकों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने के लिए ऐसे नेताओं को उनके बंगलों से बेदखल करने की कवायद शुरू हो गई है जो उस पर वर्षों से कुंडली मारकर बैठै थे। इस कड़ी में दस सर्कुलर रोड़ स्थित राबड़ी देवी को भी उनका अवास खाली करने के लिए नोटिस थमा दिया गया है। जिस पर राबड़ी देवी और उनका पूरा परिवार बीस सालों से रह रहा था।

बिहार के मुख्यमंत्री निवास के ठीक सामने स्थित यह निवास राबड़ी देवी को बीस साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से तात्कालीन नीतीश कुमार की सरकर ने आबंटित किया था। उस समय नीतीश कुमार ने बिहार के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को नि:शुल्क आवास और सुरक्षा व्यवस्था के साथ अन्य सुविधाएं सुलभ कराने का निर्णय लिया था इसी के तहत राबड़ी देवी को दस सर्कुलर रोड़ का सर्वसुविधायुक्त विशाल बंगला आबंटित किया गया था। किन्तु पटना हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को नि:शुल्क आवास उपलब्ध कराने का निर्णय रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद राबड़ी देवी से वह आवास खाली नहीं कराया गया था किन्तु अब एनडीए की सरकार बनने के बाद हाईकोर्ट के फैसले को लागू करते हुए बिहार के लोकनिर्माण और बावास विभाग ने राबड़ी देवी को आवास खाली करने का नोटिस दे दिया है।

राबड़ी देवी इस समय विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष है इस नाते उन्हें एक अन्य आवास आबंटित किया गया है किन्तु राष्ट्रीय जनता दल के नेता सरकार के इस फैसले का विराध कर रहे हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक बदले की कार्यवाही की जा रही है और लालू राबड़ी परिवार को परेशान किया जा रहा है। जबकि नीतीश कुमार की सरकार इसके पीछे नियम प्रक्रिया का हवाला दे रही है। उल्लेखनीय है कि ढाई साल पूर्व जब नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल से नाता तोड़ा था और भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी तब तात्कालीन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री निवास खाली करने का नोटिस दिया गया था लेकिन तेजस्वी यादव सरकार के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट चले गये थे और नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उपमुख्यमंत्री निवास को ही आबंटिन करने की याचिका लगाई थी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।

और उसी समय हाईकोर्ट के संज्ञान में यह बात आई थी कि बिहार में कई पूर्व मुख्यमंत्रियों नि:शुल्क कई आलीसान बंगले आबंटित किये गये हैं जिसे अवैधानिक करार देते हुए हाईकोर्ट ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास खाली करने का निर्देश दिया था कुल मिलाकर तेजस्वी यादव की पूरानी याचिका के कारण ही आज राबड़ी देवी के लिए आबंटित आवास को खाली करने की नौबत आई है। इसके अलावा लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को भी आवास खाली करने का नोटिस दे दिया गया है क्योंकि इस बार वे चुनाव हार गये हैं। तेजस्वी यादव अभी भी नेता प्रतिपक्ष के रूप में आबंटित बंगले में रह रहे हैं लेकिन उनपर भी खतरा मंडरा रहा है। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल को सिर्फ 25 सीटें ही मिली है और नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए भी राजद को 25 सीटों की ही आवश्यकता है।

यदि इन 25 विधायकों में से एक विधायक ने भी पाल बदल दिया तो तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष नहीं बन पाएंगे और ऐसी स्थिति में उन्हें जो बड़ा बंगला नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मिला हुआ है। उसे छोडऩा पड़ेगा। राबड़ी देवी भी विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मिले अपने नये बंगले में अधिकतम दो साल ही रह पाएंगी। दो साल के भीतर राष्ट्रीय जनता दल के दो विधान परिषद सदस्य सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं और अब बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह राजद के ही विधान परिषद सदस्यों का चयन करा सके।

ऐसी स्थिति में दो साल के बाद राबड़ी देवी भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं रह पाएंगी और उन्हें भी इस हैसियत से मिलने वाले नये आवास को खाली करना पड़ेगा। यही वजह है कि राष्ट्रीय जनता दल के नेता दस सर्कुलर रोड के आवास को खाली न करने की जिद पर अड़े हुए हैं। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के अुनसार उन्हें आवास खाली तो करना ही पड़ेगा इसलिए बेहतर है कि बेआबरू होकर कूचे से निकलने की जगह वे खुद यह आवास खाली कर दें।

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