NDPS Act : क्या बदल सकते हैं दशकों पुराने नियम, गांजा को लेकर तेज हुई नई बहस

देश में इन दिनों एक ऐसा मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है, जिस पर लंबे समय से अलग अलग राय सामने (NDPS Act) आती रही है। अदालत की समयसीमा करीब आने के साथ अब लोगों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिक गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों, कानून जानकारों और सामाजिक संगठनों के बीच इस विषय पर बहस पहले से ज्यादा तेज दिखाई दे रही है।

कई लोगों का मानना है कि बदलते दौर और वैश्विक रुझानों को देखते हुए पुराने कानूनों की समीक्षा होनी चाहिए, जबकि दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ इससे जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जता रहे हैं। इसी वजह से यह मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और नीतिगत बहस का विषय बन चुका है।

करीब पांच महीने पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को कैनाबिस से जुड़े कानूनों की समीक्षा करने और इस पर नीतिगत फैसला लेने के लिए छह महीने का समय दिया था। अदालत ने सरकार से कहा था कि वह विभिन्न पक्षों से चर्चा कर यह तय करे कि मौजूदा नियमों में किसी तरह की ढील देने की आवश्यकता है या नहीं। अब यह समयसीमा जुलाई 2026 के करीब पहुंच रही है।

अदालत ने सरकार को क्या निर्देश दिया NDPS Act

23 जनवरी को दिए गए आदेश में अदालत ने कैनाबिस को वैध या अवैध घोषित करने का फैसला खुद नहीं किया। इसके बजाय केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया कि वह इस विषय पर विशेषज्ञों, संबंधित विभागों और अन्य पक्षों से विचार विमर्श करे।

अदालत का कहना था कि यदि नियमों में बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो उसके उद्देश्य और प्रभाव को भी समझना जरूरी होगा। इसी के तहत सरकार को एक तय समय के भीतर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा गया है।

क्यों उठ रही है कानून बदलने की मांग

यह मामला एक ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका के जरिए अदालत तक पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि दुनिया के कई देशों में कैनाबिस को लेकर नीतियां बदल रही हैं और वैज्ञानिक शोध भी इसके कुछ नियंत्रित उपयोगों की ओर संकेत करते हैं।

याचिका में यह भी कहा गया कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और बदलते वैश्विक दृष्टिकोण को देखते हुए वर्तमान कानूनों की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए।

सरकार का क्या है पक्ष

केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि भारत में कैनाबिस पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है। चिकित्सा, वैज्ञानिक, औद्योगिक और अनुसंधान से जुड़े उद्देश्यों के लिए नियंत्रित परिस्थितियों में इसके उपयोग की अनुमति पहले से मौजूद है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ कानूनी प्रावधानों के तहत इसकी खेती और उपयोग को नियंत्रित तरीके से मंजूरी दी जा सकती है। इसलिए भारत की स्थिति पूर्ण प्रतिबंध वाले देशों जैसी नहीं मानी जा सकती।

देश में कितना व्यापक है इसका उपयोग

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों लोग किसी न किसी रूप में कैनाबिस उत्पादों का उपयोग कर (NDPS Act) चुके हैं। यही वजह है कि यह विषय केवल कानून तक सीमित नहीं है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। कानून लागू करने वाली एजेंसियां लगातार बड़ी मात्रा में गांजा जब्त करती रही हैं। कई राज्यों में अवैध खेती और तस्करी के मामले भी समय समय पर सामने आते रहते हैं।

किन राज्यों में मिली अवैध खेती

ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों को लंबे समय से गांजा उत्पादन वाले इलाकों के रूप में देखा जाता रहा है। इसके अलावा तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी अवैध खेती पकड़ी गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि तस्करी के तरीके भी बदल रहे हैं और अब अंतरराज्यीय नेटवर्क के साथ आधुनिक माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ा है।

कानून में पहले से मौजूद हैं कुछ छूट

भारत में कैनाबिस से जुड़े सभी उत्पादों पर एक जैसे नियम लागू नहीं हैं। कुछ परिस्थितियों में औद्योगिक उपयोग के लिए हेम्प की खेती की अनुमति दी जा सकती है।

उत्तराखंड पहले ही औद्योगिक हेम्प खेती को मंजूरी दे चुका है। वहीं मध्य प्रदेश ने भी चिकित्सा और औद्योगिक उपयोग के लिए नियंत्रित खेती की दिशा में कदम बढ़ाने की बात कही है। कई राज्यों में भांग का नियमन अलग व्यवस्था के तहत किया जाता है और यह कुछ सांस्कृतिक तथा धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।

दुनिया में तेजी से बदल रही तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने कैनाबिस नीति में बदलाव किए (NDPS Act) हैं। कुछ देशों ने चिकित्सा उपयोग की अनुमति दी है, जबकि कुछ ने सीमित व्यक्तिगत उपयोग को भी कानूनी मान्यता दी है।

यही वैश्विक बदलाव भारत में भी इस बहस को नई दिशा दे रहा है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय रुझानों को देखते हुए भारत में भी समीक्षा की मांग स्वाभाविक है।

जोखिमों को लेकर भी चिंता

हालांकि नियमों में ढील की मांग के साथ कई गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। युवाओं में बढ़ती पहुंच, लत लगने का खतरा, सड़क सुरक्षा और अवैध कारोबार जैसे मुद्दों को लेकर विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं।

सरकार ने भी अदालत के सामने कहा है कि यदि निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं रही तो चिकित्सा उपयोग के नाम पर गैर कानूनी इस्तेमाल बढ़ सकता है। यही वजह है कि किसी भी संभावित बदलाव को लेकर सावधानी बरतने की बात कही जा रही है।

अब सबकी निगाह केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी (NDPS Act) हुई है। आने वाले समय में यह साफ हो सकता है कि मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी या चिकित्सा और औद्योगिक उपयोग के लिए सीमित बदलाव किए जाएंगे। लेकिन इतना तय है कि अदालत के निर्देश के बाद कैनाबिस नीति पर राष्ट्रीय स्तर की बहस अब और तेज होने वाली है।

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