पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद तेजी से चर्चा (Mamata Banerjee) में आ गया है। अदालत में वकीलों की तरह गाउन और बैंड पहनकर पहुंचने के बाद ममता बनर्जी को लेकर कानूनी हलकों में बहस शुरू हो गई है। इस मामले के सामने आते ही वकीलों और राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कोलकाता में इस मुद्दे को लेकर दिनभर चर्चा बनी रही। कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या संवैधानिक पद पर रहते हुए इस तरह अदालत में पेश होने की अनुमति है। अब मामले में देश की बड़ी कानूनी संस्था की एंट्री के बाद विवाद और गहरा गया है।
बार काउंसिल ने मांगा जवाब : Mamata Banerjee
Mamata Banerjee के अदालत में गाउन पहनकर पेश होने के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से जवाब तलब किया है। संस्था ने ममता बनर्जी के वकील के तौर पर नामांकन और प्रैक्टिस की स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कई अहम सवाल भी पूछे गए हैं।
इन बिंदुओं पर मांगी जानकारी
बार काउंसिल की तरफ से पूछा गया है कि ममता बनर्जी का नामांकन नंबर क्या है और वह कब जारी किया गया था। इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि क्या उनका नाम अभी भी वकीलों के रजिस्टर में दर्ज है।
संस्था ने यह जानकारी भी मांगी है कि मुख्यमंत्री रहने के दौरान क्या उन्होंने अपनी वकालत की प्रैक्टिस स्वेच्छा (Mamata Banerjee) से रोकी थी और दोबारा शुरू करने के लिए कोई आवेदन दिया गया या नहीं।
रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश
मामले को गंभीर मानते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही साफ कहा गया है कि जांच पूरी होने तक दस्तावेजों में किसी तरह का बदलाव, ओवरराइटिंग या छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। जवाब देने के लिए तय समय सीमा भी दी गई है।
अदालत में पेश होने को लेकर क्या है नियम
कानूनी नियमों के मुताबिक केवल कानून की पढ़ाई पूरी कर लेना अदालत में प्रैक्टिस करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता। इसके लिए राज्य बार काउंसिल में नामांकन और प्रैक्टिस प्रमाण पत्र जरूरी होता है।
यदि कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर रहता है तो उसकी सक्रिय प्रैक्टिस को लेकर अलग नियम लागू (Mamata Banerjee) होते हैं। पद छोड़ने के बाद दोबारा वकालत शुरू करने के लिए प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।
विवाद पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अब आगे की जांच और रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति साफ होगी। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर नजर बनी हुई है।
