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संपादकीय: महाराष्ट्र : निकाय चुनाव में टूटा गठबंधन

Maharashtra: Alliance breaks in civic elections

Editorial: महाराष्ट्र में हो रहे नगरीय निकाय चुनाव में महाअघाड़ी और महायुति दोनों ही गठबंधन में टूट हो रही है। खासतौर पर मुंबई महानगरपालिका चुनाव में तो इन दोनों ही गठबंधनों में शामिल पार्टियां कई सीटों पर आमने सामने आ गई है। गौरतलब है कि बीएमसी का चुनाव भाजपा और शिवसेना यूबीटी के लिए नाक की लड़ाई बन गया है। बीएमसी में पिछले पच्चीस सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। किन्तु अब शिवसेना टूट गई है और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना यूबीटी को एकनाथ सिंदे पाली शिवसेना से कड़ी चुनौती मिल रही है।

उल्लेखनीय है कि बीएमसी जिसका बजट 84 हजार करोड़ रूपये का होता है और यह न सिर्फ भारत बल्कि पूरे एशिया का सबसे अमीर नगर निगम माना जाता है। इसलिए शिवसेना यूबीटी इस पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही है। शिवसेना यूबीटी ने राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ गठजोड़ कर लिया है। अब यह दोनों पार्टियां मिलकर बीएमसी की सभी 227 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। जबकि कांग्रेस ने महाअघाड़ी से किनारा कर लिया है। उद्धव ठाकरे के साथ राज ठाकरे के आ जाने से कांग्रेस को घोर आपत्ति है इसलिए उसने कुछ अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर नया गठबंधन बना लिया है।

महाअघाड़ी में शामिल शरत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी अलग राह चुन ली है और शरद पवार ने अपने भतीजे अजीत पवार से पुराने मतभेद भुलाते हुए कई सीटों पर उनके साथ समझौता कर लिया है। महाअघाड़ी की तरह ही महायुति में भी बिखराव की स्थिति बन गई है जहां अजीत पवार ने अपने चाचा शरद पवार के साथ कई सीटों पर तालमेल कर लिया है। वहीं भाजपा और एकनाथ शिदें की नेतृत्व वाली शिवसेना भी कई सीटों पर आमने सामने आ गई हैं। कुल मिलाकर नगरीय निकाय चुनाव में दोनों ही गठबंधनों में फूट पड़ गई है।

नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण में नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों के चुनाव में महायुति गठबंधन में तीन चौथाई से ज्यादा नगरीय निकायों पर कब्जा किया था इसलिए अब मुंबई महानगरपालिका सहित अन्य नगरनिगमों में वर्चास्व की लड़ाई तेज हो गई है। खासतौर पर बीएमसी में कब्जा करने के लिए दोनों ही गठबंधनों ने कमर कस ली है। दोनो की नजर 35 प्रतिशत मराठी वोटरों और 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों पर है। जिसे अपने पक्ष में करने के लिए ही इन दोनों गठबंधनों में शामिल पार्टियां विरोधी दलों के साथ ही हाथ मिला रही हैं।

मुस्लिम वोटों को हथियाने के लिए समाजवादी पार्टी भी अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ रही है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी भी बीएमसी चुनाव में ताल ठोकने जा रहे हैं। जिसकी वजह से बीएमसी चुनाव में इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। 13 करोड़ आबादी वाले मुंबई के लोग इस बार बीएमसी में शिवसेना यूबीटी का कब्जा बरकरार रखते हैं। या महायुति को मौका देते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा।

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