मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू में अपने दो दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन की शुरुआत कुकरू योग कार्यक्रम (Kukru Yoga Program) के तहत सामूहिक योगाभ्यास से की। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के साथ विभिन्न योगासन और प्राणायाम किए तथा लोगों से योग को स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने की अपील की। योगाभ्यास के बाद मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रुद्राक्ष का पौधा रोपित किया और क्षेत्र के कॉफी बागान का निरीक्षण भी किया।
स्थानीय ग्रामीणों के साथ किए कठिन योगासन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुकरू योग कार्यक्रम (Kukru Yoga Program) के दौरान स्थानीय ग्रामीणों के साथ मयूरासन, शीर्षासन सहित कई कठिन योगासन कर सभी को नियमित योग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वक्रासन, भुजंगासन और शलभासन का अभ्यास किया। इसके साथ ही नाड़ी शोधन, तितली और भ्रामरी प्राणायाम भी किया गया। कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगल सिंह धुर्वे, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में लगाया रुद्राक्ष का पौधा
योगाभ्यास के बाद मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधा लगाया। उन्होंने कहा कि पौधरोपण केवल पर्यावरण बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित भविष्य का संकल्प भी है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की।
कॉफी बागान का किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने कुकरू योग कार्यक्रम (Kukru Yoga Program) के दौरान क्षेत्र के कॉफी बागान का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और किसानों से कॉफी उत्पादन की गतिविधियों की जानकारी ली तथा क्षेत्र में कृषि और पर्यटन को जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया।
योग से मिलता है संतुलन, ऊर्जा और सकारात्मकता
योगाभ्यास के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जो तन, मन और आत्मा को संतुलन, ऊर्जा और सकारात्मकता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और सशक्त जीवन के लिए प्रत्येक व्यक्ति को योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
