भारतीय नागरिकता को लेकर इन दिनों नई बहस छिड़ (Indian Citizenship) गई है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, तो आखिर किस दस्तावेज के आधार पर किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय होती है।
चुनावी सूची, नागरिकता जांच और पहचान से जुड़े मुद्दों के बीच यह सवाल और अहम हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में नागरिकता किसी एक दस्तावेज से नहीं बल्कि कानून और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाती है।
पासपोर्ट क्या साबित करता है Indian Citizenship
विदेश मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका उद्देश्य विदेश यात्रा के दौरान व्यक्ति की राष्ट्रीयता दर्शाना और दूसरे देशों में उसे आवश्यक राजनयिक सहायता उपलब्ध कराना है।
हालांकि पासपोर्ट जारी करने से पहले कई स्तर पर जांच और पुलिस सत्यापन किया जाता है, लेकिन कानूनी विवाद की स्थिति में इसे नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जाता।
कौन सा दस्तावेज सबसे मजबूत माना जाता है
विशेषज्ञों के अनुसार नागरिकता अधिनियम के तहत जारी सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट ऑफ नैचुरलाइजेशन नागरिकता के सबसे मजबूत दस्तावेज माने जाते हैं। हालांकि ये केवल उन लोगों को जारी किए जाते हैं जिन्होंने पंजीकरण या देशीयकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त की हो। जन्म से भारतीय नागरिक बने अधिकांश लोगों के पास ऐसे प्रमाणपत्र नहीं होते।
जन्म की तारीख के अनुसार बदलते हैं नियम
एक जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मे लोगों के लिए जन्म प्रमाणपत्र प्रमुख दस्तावेज माना (Indian Citizenship) जाता है। एक जुलाई 1987 से तीन दिसंबर 2004 के बीच जन्मे लोगों के मामले में जन्म प्रमाणपत्र के साथ माता या पिता में से किसी एक की भारतीय नागरिकता का प्रमाण भी आवश्यक होता है। तीन दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति के लिए कानून के अनुसार माता पिता की नागरिकता से जुड़े नियम लागू होते हैं।
आधार, वोटर कार्ड और पैन की क्या भूमिका
आधार केवल पहचान और निवास से जुड़ा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। पैन कार्ड कर संबंधी पहचान के लिए जारी किया जाता है, जबकि वोटर पहचान पत्र केवल यह दर्शाता है कि व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है। इसी तरह राशन कार्ड भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से जुड़ा दस्तावेज है। इनमें से कोई भी अकेले भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
कैसे तय होती है नागरिकता
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में नागरिकता का निर्धारण संविधान, नागरिकता अधिनियम 1955 और संबंधित नियमों के आधार पर किया (Indian Citizenship) जाता है। किसी विवाद की स्थिति में अदालतें और संबंधित प्राधिकरण जन्म प्रमाणपत्र, माता पिता के दस्तावेज, पासपोर्ट, स्कूल रिकॉर्ड, मतदाता सूची और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को एक साथ देखकर निर्णय लेते हैं। यानी भारत में नागरिकता किसी एक दस्तावेज पर नहीं, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर तय होती है।
