देशभर में दक्षिण पश्चिम मॉनसून लगभग पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन कई राज्यों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज (Monsoon Update) की जा रही है। कहीं खेतों में पानी की कमी बनी हुई है तो कहीं कुछ इलाकों में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर मॉनसून पहुंचने के बावजूद बारिश क्यों नहीं हो रही।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून का किसी राज्य तक पहुंचना और वहां लगातार अच्छी बारिश होना दो अलग-अलग बातें हैं। इस बार मॉनसून की गति और बारिश का वितरण दोनों सामान्य पैटर्न से अलग रहे हैं।
मॉनसून पहुंचना और अच्छी बारिश होना अलग बात Monsoon Update
मौसम विभाग के अनुसार जब किसी क्षेत्र में मॉनसून पहुंचने की घोषणा की जाती है, तो इसका अर्थ यह होता है कि वहां मॉनसूनी हवाएं सक्रिय हो चुकी हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं होता कि उसी समय तेज या लगातार बारिश भी शुरू हो जाएगी। वास्तविक वर्षा कई अन्य मौसमीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
इस बार बीच में धीमी पड़ गई मॉनसून की रफ्तार
इस वर्ष मॉनसून ने केरल में समय से पहले प्रवेश किया, लेकिन इसके बाद कुछ समय तक इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। अनुकूल हवाएं कमजोर होने के कारण कई दिनों तक मॉनसून आगे नहीं बढ़ पाया। बाद में मॉनसून ने फिर गति पकड़ी, लेकिन कई राज्यों में बारिश रुक-रुक कर होती रही, जिससे कुल वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई।
कई राज्यों में अब भी बारिश की कमी
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित कई राज्यों में अब भी सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और कुछ अन्य क्षेत्रों में वर्षा सामान्य के करीब रही, जबकि कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश भी दर्ज की गई।
एल नीनो जैसी परिस्थितियों का भी असर
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार बारिश के असमान वितरण के पीछे एल नीनो जैसी परिस्थितियां भी एक बड़ी वजह हो सकती हैं। प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव से मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के तंत्र भी कम सक्रिय होते हैं। इसका असर देश के अंदरूनी हिस्सों में होने वाली बारिश पर पड़ता है।
खेती और जल संकट बढ़ने की आशंका
बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ सकता (Monsoon Update) है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दलहनी फसलें समय पर होने वाली वर्षा पर काफी निर्भर रहती हैं। यदि जुलाई के शेष दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो सिंचाई, पेयजल, जलाशयों के जलस्तर और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
जुलाई के अगले सप्ताह होंगे अहम
अब मौसम विभाग की नजर जुलाई के आने वाले दिनों पर है। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो अब तक की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। वहीं बारिश सामान्य से कम रहने पर कई राज्यों में कृषि और जल प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
