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हैदराबाद एनकाउंटर के दूसरे दिन सीजेआई बोबड़े ने बताया कि न्याय कैसे…

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जोधपुर/नई दिल्ली/ नवप्रदेश। हैदराबाद (hyderabad) सामूहिक दुष्कर्म व हत्या के आरोपी चारों आरोपियों के एनकाउंटर (hyderabad encounter) के दूसरे दिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े (cji sharad arvind bobde) ने अहम बात कही है। उन्होंने कहा कि यदि न्याय बदले की भावना से किया गया तो यह कतई न्याय नहीं हो सकता।

उन्होंने आगे कहा, ‘न्याय तात्कालिक नहीं हो सकता और यह अपना चरित्र तब खो देता है, जब यह बदले की भावना से किया गया हो।’ हालांकि इस दौरान उन्होंने हैदराबाद मामले का जिक्र नहीं किया। बोबड़े शनिवार को जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे।

इस दौरान उनके (cji sharad arvind bobde) साथ केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थी। गौरतलब है कि हैदराबाद (hyderabad) में एक महिला पशु चिकित्सक से सामूहिक दुष्कर्म कर चार आरोपियों ने उसे जिंदा जला दिया था। तेलंगाना पुलिस द्वारा उन चारों आरोपियों का एनकाउंटर (hyderabad encounter) कर दिया गया। जिसके बाद इसको लेकर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे अच्छा बताकर पुलिस की वाहवाही कर रहा है तो वहीं दूसरा तबका इसकी निंदा कर रहा है।

पुलिस के खिलाफ ये पहुंचे हैं सुप्रीम कोर्ट में

तेलंगाना पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ ऐडवोकेट जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने अपनी याचिका में कहा है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कोर्ट के साल 2014 में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। याचिका में कहा गया है कि एनकाउंटर में शामिल पुलिकर्मियों के खिलाफ एफआईआर की जानी चाहिए और जांच करके कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले में कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा।

ऐसे हुआ था हैवानों का अंत

चारों आरोपी शिवा, नवीन, केशवुलू और मोहम्मद आरिफ पुलिस रिमांड में थे। बताया जा रहा है कि पुलिस क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए चारों को उस फ्लाइओवर के नीचे लेकर गई थी, जहां उन्होंने पीडि़ता को जिंदा जलाया था। इसी बीच चारों ने पुलिस के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर पथराव भी किया। इस पर पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई करते हुए चारों को शूट कर दिया।

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