High Court Order : बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षक ने खुद लड़ी कानूनी जंग, अदालत ने सुनाया अहम फैसला

बिलासपुर में एक शिक्षक की अनोखी कानूनी पहल इन दिनों चर्चा का विषय बनी (High Court Order) हुई है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान व्याख्याता ने किसी वकील की मदद लेने के बजाय खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान उनकी दलीलों और परिस्थितियों ने अदालत का ध्यान खींचा, जिसके बाद मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

शिक्षा विभाग में पदस्थ इस शिक्षक की परेशानी लंबे समय से बनी हुई थी। परिवार एक शहर में और नौकरी दूसरे जिले में होने के कारण उन्हें लगातार आवागमन और पारिवारिक देखभाल से जुड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने विस्तार से अपनी स्थिति न्यायालय के सामने रखी।

अदालत में स्वयं रखा पक्ष : High Court Order

मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले के हाई स्कूल मरकेली में पदस्थ व्याख्याता गया राम दुबे ने न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे भिलाई में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और उनकी देखरेख करने वाला परिवार में कोई अन्य सदस्य नहीं है।

दूरी बनी परेशानी की वजह

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वर्तमान पदस्थापना स्थल और भिलाई के बीच करीब 150 किलोमीटर की दूरी है। इस कारण उन्हें पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानांतरण आवेदन पर नहीं हुआ फैसला

उन्होंने बताया कि जून 2025 में उनका तबादला बालोद जिले के कुमुदकट्टा से मरकेली किया (High Court Order) गया था। लगभग एक वर्ष तक सेवाएं देने के बाद उन्होंने एक अप्रैल 2026 को दुर्ग संभाग के संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा के समक्ष बालोद अथवा दुर्ग जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि विभाग की ओर से आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

शासन ने नहीं किया विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से भी आवेदन पर निर्णय लेने के अनुरोध का विरोध नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने मामले पर विचार करते हुए लंबित आवेदन को लेकर अपनी टिप्पणी की।

45 दिनों में निर्णय लेने का निर्देश

न्यायालय ने कहा कि जब अभ्यावेदन विभाग के समक्ष लंबित है तो उसे अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा (High Court Order) जा सकता। अदालत ने संयुक्त संचालक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर कानून के अनुसार 45 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। इसी निर्देश के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Exit mobile version