कभी कभी एक छोटी सी लापरवाही किसी के लिए बड़ा नुकसान (Flight Delay) बन जाती है। केरल के एक किसान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब विदेश से बड़ी उम्मीद के साथ लाया जा रहा एक दुर्लभ पौधा समय पर घर नहीं पहुंच सका। इसके बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई अब किसान के पक्ष में खत्म हुई है।
मामला सामने आने के बाद लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई। आखिर एक पौधे के खराब होने पर मुआवजे का आदेश कैसे दिया गया और उपभोक्ता आयोग ने किस आधार पर एयरलाइन को जिम्मेदार माना, यही सवाल लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
दुर्लभ पौधा खरीदने विदेश गया था किसान : Flight Delay
केरल के पलक्कड़ निवासी अब्दुल अजीज हाइब्रिड फलों की खेती और शोध कार्य से जुड़े हुए हैं। अगस्त 2025 में वह मलेशिया और इंडोनेशिया गए थे, जहां से उन्होंने हाइब्रिड कटहल का एक विशेष पौधा खरीदा था। यात्रा पूरी करने के बाद वह पौधे को लेकर भारत लौट रहे थे। उनकी योजना थी कि कुआलालंपुर के रास्ते कोच्चि पहुंचकर पौधे को सुरक्षित अपने खेत तक ले जाएं।
उड़ान में देरी से बिगड़ गया पूरा कार्यक्रम
वापसी के दौरान मेदान कुआलानामु से उड़ान निर्धारित समय पर नहीं चल सकी। फ्लाइट कई घंटे देरी से रवाना हुई, जिसके कारण किसान की आगे की कनेक्टिंग उड़ान छूट गई। यात्रा में हुए इस विलंब का असर उस पौधे पर पड़ा, जिसे विशेष देखभाल की जरूरत थी। किसान का दावा था कि देरी के कारण पौधा खराब हो गया और उसकी पूरी मेहनत पर पानी फिर गया।
आयोग में पहुंचा मामला
घटना के बाद किसान ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि एयरलाइन को नोटिस भेजे जाने के बावजूद उसकी ओर से कोई जवाब प्रस्तुत (Flight Delay) नहीं किया गया। न तो कोई प्रतिनिधि आयोग के सामने उपस्थित हुआ और न ही लिखित पक्ष रखा गया। ऐसे में आयोग ने उपलब्ध तथ्यों और शिकायतकर्ता की दलीलों के आधार पर मामले की सुनवाई की।
सेवा में कमी को माना जिम्मेदार
आयोग ने माना कि उड़ान में देरी और कनेक्टिंग यात्रा छूटने के पीछे सेवा में कमी और समन्वय की विफलता जिम्मेदार रही। इसके कारण शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। आयोग ने यह भी कहा कि किसान की पूरी विदेश यात्रा का उद्देश्य प्रभावित हुआ और अब उसे दूसरा पौधा खरीदने के लिए फिर से यात्रा करनी पड़ सकती है।
45 दिनों में करना होगा भुगतान
आयोग ने एयरलाइन को टिकट राशि लौटाने के साथ यात्रा और ठहरने के खर्च का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा सेवा में कमी के लिए अलग से मुआवजा और कानूनी खर्च भी देने (Flight Delay) को कहा गया है। सभी मदों को मिलाकर कुल 90 हजार 750 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त हर्जाना भी देना होगा।
उपभोक्ताओं के लिए बना उदाहरण
यह फैसला उन यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिन्हें सेवा में कमी के कारण नुकसान उठाना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं के अधिकारों को और मजबूती मिलेगी। अब यह मामला केवल एक किसान और पौधे की कहानी नहीं, बल्कि जवाबदेही और उपभोक्ता अधिकारों की मिसाल बनकर सामने आया है।
