Editorial: प्रदेश के नगरीय निकायों में पार्षद, अध्यक्ष और महापौर के पतियों तथा अन्य रिश्तेदारों की दखलअंदाजी बढऩे की शिकायतें समय समय पर सामने आती रही है लेकिन राज्य सरकार ने इस पर कभी गंभीरतापूर्वक ध्यान नहीं दिया और न ही पार्षद पतियों की दखलअंदाजी को रोकने की दिशा में कोई कारगर कदम उठाया।
नतीजतन पार्षद पतियों के हौसले बुलंद होते गये। पूर्व में एक बार जब ऐसी शिकायातें बढ़ी तो नगरीय प्रसाशन विभाग ने एक आदेश जारी कर अपने कत्वर्य की इतिश्री कर ली थी। अब नगरीय प्रशासन विभाग ने ऐसे नगरीय निकायों में जहां महिला जनप्रतिनिधिी हैं उनके कामकाज में दखल देने वाले उनके पतियों और अन्य पारिवारिक सदस्यों पर कड़ाईपूर्वक प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी कर दिये हैं। गौरतलब है कि अनेक नगरीय निकायों में पार्षद ही नहीं बल्कि अध्यक्ष और महापौर के पति भी नगरीय निकाय के अधिकारियों की बैठक लेते रहे हैं और उन्हें निदेर्श देते रहे हैं।
इन महिला जनप्रतिनिधियों के घरों में जब आम जनता अपनी शिकायत लेकर जातें है तो वहां भी महिला जनप्रतिनिधि की जगह उनके पति या अन्य परिजन ही शिकायतें सुनतें है। कमोवेश यही स्थिति ग्राम पंचायातों की भी है। वहां भी महिला पंच और सरपंच की जगह उनके पति और परिवार वाले ही पंचायत चलाते हैं। बहरहाल देर से ही सही लेकिन नगरीय प्रशासन विभाग ने दुरूस्त कदम उठाया है अब देखना होगा कि उसके इस सख्त निर्देश का कितनी ईमानदारी से पालन किया जाता है।

