संसद के मानसून सत्र से पहले दिल्ली की सियासत का माहौल पूरी तरह बदल (Delimitation Bill) चुका है। जिन मुद्दों पर कुछ महीने पहले सरकार को सदन में झटका लगा था, अब उन्हीं पर नए राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। विपक्षी दलों में लगातार हो रहे बदलावों ने संसद के आगामी सत्र को पहले से ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर तैयारी में जुटी है। इस बीच विपक्षी दलों में हुई राजनीतिक हलचल ने संसद के अंकगणित को भी प्रभावित किया है। कई दलों में टूट और बदले समीकरणों के चलते सरकार के लिए नए अवसर बनते नजर आ रहे हैं।
अप्रैल में नहीं मिल पाया था जरूरी समर्थन Delimitation Bill
अप्रैल में विशेष सत्र के दौरान सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को पारित कराने की कोशिश की थी। मतदान में विधेयक के पक्ष में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका और संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद सरकार ने नए सिरे से राजनीतिक रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी।
तीन महीने में बदले कई बड़े समीकरण
अप्रैल से जुलाई के बीच कई विपक्षी दलों में राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों के अलग होने की चर्चा रही। महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ जाने से विपक्ष की ताकत प्रभावित हुई। वहीं कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों के रुख को लेकर भी राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चाएं तेज रहीं।
सरकार क्यों मान रही खुद को मजबूत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ क्षेत्रीय दलों या उनके सांसदों का समर्थन सरकार को मिलता है तो लोकसभा में उसका आंकड़ा पहले की तुलना में काफी मजबूत हो सकता है। इसी वजह से आगामी मानसून सत्र में सरकार एक बार फिर दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
दो तिहाई बहुमत पर टिकी नजर Delimitation Bill
संविधान संशोधन वाले किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए लोकसभा में दो तिहाई बहुमत जरूरी होता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सत्ता पक्ष लगातार सहयोगी दलों और संभावित समर्थन देने वाले सांसदों से संपर्क बनाए हुए है। दूसरी ओर विपक्ष भी सरकार की रणनीति का मुकाबला करने के लिए अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है।
मानसून सत्र में दिख सकता है सियासी मुकाबला
20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक सबसे ज्यादा चर्चा में रहने (Delimitation Bill) की संभावना है। दोनों पक्ष अपने अपने आंकड़ों और रणनीति के साथ मैदान में उतरेंगे। ऐसे में संसद के भीतर होने वाली बहस और मतदान पर पूरे देश की नजर रहेगी।
