रिपोर्टर – साहिल राज लहरे
जांजगीर की पुलिस लाइन में इन दिनों एक ही मामले की सबसे ज्यादा (Cyber Fraud) चर्चा रही। बैरक के भीतर हुई एक ऐसी वारदात ने सभी को चौंका दिया, जिसमें भरोसे के बीच ही बड़ी सेंध लग गई। पहले मोबाइल गायब हुआ और फिर खाते से लाखों रुपये निकलने की जानकारी सामने आते ही हर कोई हैरान रह गया।
घटना की परतें खुलीं तो मामला और भी गंभीर निकला। साइबर थाना पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो शक अपने ही साथी पुलिसकर्मी पर जा पहुंचा। पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
बैरक से मोबाइल गायब होने के बाद खाते से निकले 4.87 लाख रुपये Cyber Fraud
बलरामपुर रामानुजगंज जिले के ग्राम चांदो निवासी सुधीर कुमार सिंह, जो 11वीं बटालियन जांजगीर में आरक्षक (Cyber Fraud) के पद पर पदस्थ हैं, ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल 2026 की रात करीब 10 बजे अपना वीवो वाई 21 मोबाइल बैरक में चार्जिंग पर लगाया था। मोबाइल में जियो के दो सिम लगे हुए थे। रात करीब 11 बजे ड्यूटी पर जाने से पहले जब मोबाइल लेने पहुंचे तो वह वहां नहीं मिला।
कुछ दिन बाद जब उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी और बैंक पहुंचे तो खाते में रकम नहीं थी। बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला कि 24 अप्रैल से 3 मई 2026 के बीच अलग अलग ऑनलाइन माध्यमों से कुल 4 लाख 87 हजार 911 रुपये निकाल लिए गए थे। इसके बाद उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई।
आधार नंबर से बनाई गई यूपीआई आईडी
साइबर थाना पुलिस की जांच में सामने आया कि चोरी किए गए मोबाइल में मौजूद आधार नंबर का इस्तेमाल कर आरोपी ने नई यूपीआई आईडी तैयार की। इसके बाद उसी के जरिए पीड़ित आरक्षक के बैंक खाते से कई बार में रकम निकाल ली गई।
ऑनलाइन गेम की लत में उड़ाई पूरी रकम
जांच के दौरान पुलिस का संदेह 11वीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक सुनील कुमार यादव पर गया। घटना के बाद से वह बटालियन परिसर में भी मौजूद (Cyber Fraud) नहीं था। पूछताछ के लिए बुलाने पर आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि ऑनलाइन गेम खेलने की लत के कारण उसने चोरी की गई पूरी रकम गेम में खर्च कर दी।
इन धाराओं में हुई कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी के मेमोरेंडम कथन और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 सी और 66 डी के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
पूरे मामले की कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप के मार्गदर्शन और सीएसपी योगिताबाली खापर्डे के नेतृत्व में पूरी (Cyber Fraud) की गई। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक भास्कर शर्मा, एएसआई विवेक सिंह, प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा, राजकुमार चंद्रा, विवेक सिंह तथा आरक्षक पदमराज सिंह, प्रतीक सिंह और विशाल कौशिक ने जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
