कटक के सरकारी अस्पताल में ट्रॉमा केयर ICU में लगी आग ने रविवार को बड़ा हादसा (Cuttack Hospital Fire) खड़ा कर दिया। इस घटना में 10 मरीजों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।
अस्पताल के भीतर अचानक फैले धुएं और अफरा-तफरी के बीच मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन हालात इतने तेजी से बिगड़े कि कई जिंदगियां नहीं बच सकीं। ICU जैसे संवेदनशील हिस्से में हुए इस हादसे ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, हादसे के वक्त वार्ड में कई मरीज भर्ती थे। आग लगते ही पूरे इलाके में धुआं फैल गया, जिससे मरीजों और स्टाफ के बीच घबराहट की स्थिति बन गई। बचाव कार्य के दौरान कुछ मरीजों को बाहर निकाला गया,
लेकिन कई लोग धुएं और झुलसने की चपेट में आ गए। अस्पताल के कुछ कर्मचारी भी इस हादसे में घायल हुए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों की भीड़ लग गई और माहौल बेहद गमगीन हो गया।
हादसे के बाद शुरुआती जांच में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई (Cuttack Hospital Fire) जा रही है। माना जा रहा है कि ICU में लगे एयर कंडीशनिंग सिस्टम या किसी मेडिकल उपकरण में तकनीकी खराबी के कारण आग भड़की हो सकती है। हालांकि आग लगने की असली वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दे दिए हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।
इस हादसे के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और तकनीकी निगरानी कितनी मजबूत है। खासकर ICU और ट्रॉमा केयर जैसे वार्डों में छोटी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
कटक के इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि अस्पतालों में इलाज के साथ-साथ सुरक्षा इंतजाम (Cuttack Hospital Fire) भी उतने ही जरूरी हैं। जिन परिवारों ने अपने मरीजों को बेहतर इलाज की उम्मीद के साथ अस्पताल में भर्ती कराया था, उनके लिए यह घटना गहरे सदमे से कम नहीं है। अब सभी की नजर जांच पर है, ताकि हादसे की असली वजह सामने आए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
