संपादकीय: देश का माहौल बिगाडऩे की साजिश

conspiracy to vitiate the country’s atmosphere: एफआईआर को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष द्वारा विरोध जताने और हंगामा खड़ा करने की कोशिशों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा है कि विपक्ष देश का माहौल बिगाडऩे की साजिश रच कर रहा है। जेपी नड्डा की यह आशंका सही है तो वाकई यह देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है और सरकार को सतर्क हो जाना है।

देश का माहौल बिगाडऩे की मंशा रखने वालों को बेनकाब करना चाहिए तथा उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने से नहीं हिचकना चाहिए। विपक्ष को सरकार के फैसलों का विरोध करने का अधिकार है। वह सरकार को घेर सकती है और आरोपों के कटघरे में खड़ा कर सकता है लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर यदि देश का माहौल बिगाडऩे का साजिश रचता है तो उसे भला कैसे स्वीकारा जा सकता है। जेपी नड्डा का कहना है कि विपक्ष सत्ता हथियाना चाहता है इसलिए झूठे और मनगढंत आरोप लगाकर माहौल खराब कर रहा है। यदि ऐसा है तो सवाल यह उठता है कि सरकार हाथ पर हाथ धरकर तमाशा क्यों देख रही है।

मामूली जख्म को नासूर क्यों बनने दे रही है? सरकार के जिम्मेदार लोग सिर्फ इस तरह के बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बरी नहीं हो सकते। यदि देश का माहौल बिगड़ता है और शांति भंग होती है तो इसके लिए माहौल बिगाडऩे वाले तो जिम्मेदार होंगे ही सरकार भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती जो सब कुछ देखते और समझते हुए भी मूकदर्शक बनकर बैठी रही। जहां तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों का प्रश्न है तो तीनों चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं है। इसके बाद इस विवाद का पटाक्षेप हो जाना चाहिए था लेकिन विपक्षी पार्टियां खासतौर पर भारतीय कॉकरोच पार्टी इसे लेकर आंदेालन तेज करने पर उतारू है।

गौरतलब है कि भारतीय कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभीजित दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वे अपने पद से इस्तीफा दे दें अन्यथा कॉकरोच देशव्यापी आंदोलन करेंगे। इसके तत्काल बाद डफली गैंग ने जंतर मंतर पर पहुंच कर मोर्चा खोल दिया और फिर से आपत्तिजनक नारे लगाने लगे लेकिन इस बार दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की। नतीजतन उनका विरोध प्रदर्शन फ्लाप शो साबित हुआ। इस बीच कांग्रेस पार्टी ने भी देश के कई राज्यों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन प्रदर्शन तक तो बात समझ में आती है लेकिन विपक्षी के कई नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विवादास्पद बयानबाजी भी शुरू कर दी। वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी जिन्हें ज्ञानेश कुमार के अलावा अन्य दो चुनाव आयुक्तों का नाम भी पता नहीं है उन्होंने बयान दिया है कि यदि उनके लिए एक खून माफ होता तो वे ज्ञानेश कुमार को गोलीमार देते। इसी तरह पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार को बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दे देनी चाहिए। इस तरह के बयान देना इन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की कलुषित मानसिकता को दर्शाता है और इस तरह के बयानों से ही माहौल खराब होता है। विपक्ष के नेताओं को ऐसी आपत्तिजनक बयानाजी से बचना चाहिए ताकि देश में माहौल खराब न हो।

↑
Exit mobile version