लंबे समय से लंबित पड़े एक मामले में अदालत के निर्देश के बाद नई उम्मीद (Compassionate Appointment) जगी है। परिवार के भरण पोषण के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रही एक महिला को राहत मिलने की संभावना बनी है। कई वर्षों से निर्णय का इंतजार कर रहे मामले पर अब संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में कार्रवाई करनी होगी।
मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई पहलुओं पर चर्चा हुई। याचिकाकर्ता का कहना था कि आवेदन देने के बाद भी लंबे समय तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
आरक्षक की मृत्यु के बाद किया था आवेदन : Compassionate Appointment
मामला बलौदाबाजार भाटापारा जिले की निवासी सावित्री ठाकुर से जुड़ा है। उनके पति लोकप्रताप सिंह पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान 17 सितंबर 2018 को उनका निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए सावित्री ठाकुर ने 13 जनवरी 2021 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।
वर्षों तक लंबित रहा मामला
याचिका के अनुसार आवेदन जमा किए जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर लंबे समय तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। समय बीतने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से परेशान होकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने न्यायालय से आवेदन पर निर्णय कराने की मांग की थी।
शासन ने रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से याचिका का विरोध किया गया। शासन ने अदालत को बताया कि आरक्षक की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण से जुड़ा आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि बाद में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था। इसके बावजूद शासन की ओर से कहा गया कि पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में ऐसे तथ्यों पर विचार किया जाना आवश्यक है।
अदालत ने दिया समयबद्ध निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि आवेदन अब भी लंबित है। अदालत ने मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना संबंधित प्राधिकारी को आवेदन पर निर्णय लेने (Compassionate Appointment) के निर्देश दिए।
न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया कि आवेदन पर आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर नियमानुसार विचार कर विधिसम्मत निर्णय लिया जाए।
क्या हैं मामले के प्रमुख बिंदु
आरक्षक लोकप्रताप सिंह का सितंबर 2018 में निधन हुआ था।
उनकी पत्नी ने जनवरी 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
आवेदन पर कई वर्षों तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
शासन ने आपराधिक प्रकरण का उल्लेख करते हुए आपत्ति जताई।
ट्रायल कोर्ट से याचिकाकर्ता को संदेह का लाभ मिल चुका है।
हाईकोर्ट ने अब 90 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश जारी किया है।
