Chhura Block Kongalbahara Nala: प्रशासन से टूटी आस तो ग्रामीण बने अपने भाग्य के निर्माता, नाले पर बनाई वैकल्पिक पुलिया

सरकारी सिस्टम की अनदेखी के बीच ग्रामीणों का ‘रामसेतु’, चंदे और श्रमदान से बनाया वैकल्पिक रास्ता

छुरा/नवप्रदेश। शासन-प्रशासन से वर्षों तक गुहार लगाने के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो राजपुर और धर्मपुर (Chhura Block Kongalbahara Nala) के ग्रामीणों ने इंतजार करने के बजाय अपनी समस्या का रास्ता खुद निकालने का फैसला किया। छुरा विकासखंड मुख्यालय से महज चार से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोंगालबाहरा नाला लंबे समय से टेंगनाबासा-सिवनी मार्ग पर आवागमन में बड़ी बाधा बना हुआ है। बारिश के दिनों में नाले का जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीणों का मुख्यालय से संपर्क लगभग टूट जाता है। ऐसे में दोनों गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर चंदा जुटाया, जेसीबी और ट्रैक्टर की व्यवस्था की तथा श्रमदान कर नाले पर वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की पहल शुरू कर दी।


ग्रामीणों की यह पहल महज एक रास्ता बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित समस्या के सामने उनकी एकता, आत्मनिर्भरता और सामूहिक इच्छाशक्ति की तस्वीर बनकर सामने आई है। निर्माण कार्य में गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल तैयार किया जा रहा यह वैकल्पिक रास्ता बरसात के दिनों में तत्काल राहत देने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है, ताकि स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों, बुजुर्गों और जरूरी काम से छुरा आने-जाने वाले लोगों को परेशानी न हो।

रामसेतु की कथा से जोड़कर देख रहे ग्रामीण

ग्रामीणों की इस सामूहिक पहल (Chhura Block Kongalbahara Nala) को स्थानीय लोग त्रेता युग में भगवान श्रीराम द्वारा लंका विजय के लिए बनाए गए सेतु की कथा से भी जोड़कर देख रहे हैं। धार्मिक कथा के अनुसार जब समुद्र से मार्ग देने का आग्रह सफल नहीं हुआ, तब भगवान श्रीराम ने वानर सेना के साथ मिलकर सामूहिक प्रयास से समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था। उसी तरह आज राजपुर और धर्मपुर के ग्रामीण भी लंबे इंतजार और गुहार के बाद अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर कोंगालबाहरा नाले पर रास्ता तैयार करने में जुटे हैं। फर्क इतना है कि उस दौर में पत्थरों और सामूहिक श्रम से सेतु बनाया गया था, जबकि आज के ग्रामीणों ने जेसीबी, ट्रैक्टर और अन्य आधुनिक संसाधनों के साथ मानव श्रम को जोड़कर वैकल्पिक पुलिया तैयार करने का बीड़ा उठाया है। निर्माण में होने वाले खर्च के लिए दोनों गांवों से सहयोग राशि जुटाई गई है।

चार किलोमीटर की दूरी, लेकिन बारिश में 15 किलोमीटर का सफर

कोंगालबाहरा नाला टेंगनाबासा से सिवनी मार्ग को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। छुरा विकासखंड मुख्यालय की दूरी यहां से लगभग चार से पांच किलोमीटर ही है, लेकिन नाले पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में यही छोटी दूरी ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है। नाले में पानी बढ़ने पर रास्ता बंद हो जाता है और ग्रामीणों को दूसरे मार्ग से करीब 15 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय कर छुरा मुख्यालय पहुंचना पड़ता है।

इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, किसानों, मजदूरों और रोजमर्रा के जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है। पानी कम होने की स्थिति में वाहन किसी तरह नाला पार कर लेते हैं, लेकिन खराब रास्ते और पानी के कारण वाहनों में तकनीकी खराबी की समस्या भी बनी रहती है। तेज बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है।

आपात स्थिति में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चिंता आपात स्थिति को लेकर रहती है। किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना हो, गर्भवती महिला को स्वास्थ्य केंद्र ले जाना हो अथवा बच्चों को स्कूल पहुंचाना हो, नाले (Chhura Block Kongalbahara Nala) का रास्ता बाधा बन जाता है। बारिश के दिनों में कई बार ग्रामीणों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि कोंगालबाहरा नाला पर स्थायी पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। आखिरकार ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से वैकल्पिक व्यवस्था खड़ी करने का निर्णय लिया।

वैकल्पिक पुलिया राहत, स्थायी समाधान नहीं

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा तैयार की जा रही वैकल्पिक पुलिया तत्काल राहत के लिए है। इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। उनकी मूल मांग आज भी कोंगालबाहरा नाला पर मजबूत और स्थायी पुल निर्माण की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां पक्का पुल बन जाता है तो टेंगनाबासा, सिवनी, राजपुर, धर्मपुर सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को सालभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। इससे छुरा मुख्यालय तक पहुंचने के लिए अनावश्यक लंबी दूरी तय करने की मजबूरी भी खत्म होगी। ग्रामीणों की इस पहल ने एक तरफ जहां वर्षों पुरानी समस्या को फिर से सामने ला दिया है, वहीं दूसरी ओर यह भी साबित किया है कि जब सामूहिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो संसाधनों की कमी भी रास्ते की सबसे बड़ी बाधा नहीं बनती। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मेहनत और मजबूरी को देखते हुए शासन-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और कोंगालबाहरा नाला पर स्थायी पुल निर्माण की दिशा में जल्द ठोस पहल करेगा।

ग्रामीणों की एकजुटता बनी पहल की ताकत

कोंगालबाहरा नाला पर वैकल्पिक पुलिया (Chhura Block Kongalbahara Nala) निर्माण किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि राजपुर और धर्मपुर के ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग का परिणाम है। ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग देने के साथ ही मौके पर पहुंचकर श्रमदान भी किया। इस सामूहिक प्रयास में बिसाहू राम सिन्हा, देवलाल सिन्हा, खमंसिह ठाकुर, केलसिंह ठाकुर, सालिक राम सिन्हा, कुंजलाल ठाकुर, दुलार ठाकुर, ईश्वर सिंह ठाकुर, लवकुश नायक, निरंजन सिंह ध्रुव, छत्तरपुर संतुराम कमार, चम्पेश्वर साहू, नितेश ध्रुव, राकेश यादव, अजय (तावड़े), नंद कुमार साहू, पुष्पराज कुमार एवं टिकट ध्रुव सहित अन्य ग्रामीणों का सहयोग रहा। किसी ने चंदा देकर मशीनों के खर्च में सहयोग किया तो किसी ने मौके पर पहुंचकर श्रमदान किया। ग्रामीणों की यही सामूहिक भागीदारी इस पहल की सबसे बड़ी ताकत बनी है।

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