CG High Court Bail Journalist : पत्रकार को राहत, SC ST एक्ट केस में हाईकोर्ट का अहम फैसला सामने आया

बिलासपुर में इस वक्त (CG High Court Bail Journalist) मामला काफी चर्चा में है। एक पत्रकार को जमानत मिलने के बाद अब कानूनी और मीडिया दोनों ही सर्कल में इस फैसले को लेकर बातें हो रही हैं। लोगों के बीच भी ये सवाल उठ रहा है कि आखिर कोर्ट ने किन आधारों पर ये राहत दी।

ग्राउंड पर बात करें तो इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग राय दिख रही है। कुछ लोग इसे न्यायिक संतुलन बता रहे हैं तो कुछ अब भी पूरे केस को लेकर संशय में हैं। लेकिन इतना जरूर है कि इस फैसले के बाद मामला फिर से चर्चा में आ गया है और आगे की सुनवाई पर सबकी नजर है।

हाईकोर्ट का फैसला (CG High Court Bail Journalist)

हाईकोर्ट ने एससी एसटी एक्ट से जुड़े इस मामले में आरोपी पत्रकार मोहन निषाद को राहत देते हुए उन्हें जमानत दे दी है। जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया।

मामला क्या है

मामले की जानकारी के मुताबिक, बालोद जिले के डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र में दर्ज इस केस में मोहन निषाद पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 2, 351 2, 3 5 के साथ साथ एससी एसटी एक्ट की धारा 3 1 आर के तहत अपराध दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता मनीराम तारम हैं, जो छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत बताए गए हैं।

शिकायत में कहा गया कि 17 अक्टूबर 2025 को एक व्यक्ति खुद को पत्रकार बताते हुए उनके पास पहुंचा और 11 साल के बच्चे की करंट से मौत से जुड़ी खबर छापने की बात कहकर 2 लाख रुपए (CG High Court Bail Journalist) की मांग की। आरोप यह भी लगाया गया कि पैसे नहीं देने पर आरोपी ने जातिसूचक गालियां दीं, धमकाया और सोशल मीडिया के जरिए गलत आरोप लगाकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। इस पूरे मामले में पुलिस ने खिलावन चंद्राकर और मोहन निषाद के खिलाफ केस दर्ज किया था।

FIR में देरी पर उठे सवाल

अपील के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि मोहन निषाद एक न्यूज पोर्टल से जुड़े पत्रकार हैं और उन्होंने सिर्फ बच्चे की मौत से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी। इसी वजह से उनके खिलाफ रंजिश में झूठा मामला दर्ज कराया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि घटना के लगभग चार महीने बाद एफआईआर दर्ज होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने यह माना कि आरोपी 18 मार्च 2026 से जेल में बंद है और ट्रायल पूरा होने में अभी समय लग सकता है। ऐसे में कोर्ट ने जमानत देना उचित (CG High Court Bail Journalist) समझा। इस फैसले से आरोपी को फिलहाल राहत मिल गई है, जबकि मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे जारी रहेगी।

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