कोरबा के आसपास के इलाकों में इस मामले की चर्चा तेजी से फैल (CG High Court) रही है। CG High Court के इस फैसले ने उन जोड़ों के बीच उम्मीद जगाई है जो अपनी पसंद से शादी करने के बाद दबाव और डर में जी रहे हैं। गांव और मोहल्लों में लोग खुलकर बोल रहे हैं कि अगर अदालत साथ खड़ी हो जाए तो हालात बदल सकते हैं।
दूसरी तरफ कुछ लोग इसे समाज और परिवार के बीच टकराव का मामला भी मान रहे हैं। CG High Court के आदेश के बाद अब लोगों की नजर पुलिस की कार्रवाई पर है। कई युवाओं का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर सुरक्षा मिलना सबसे जरूरी है, नहीं तो हालात बिगड़ जाते हैं।
कोर्ट का सख्त रुख (CG High Court)
इसी मामले में हाईकोर्ट ने लव मैरिज करने वाले दंपति को सुरक्षा देने के लिए कोरबा एसपी को निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ कहा है कि याचिकाकर्ताओं को किसी तरह की हानि न पहुंचे और उनके जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अगर वे कोई शिकायत करते हैं तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए और कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाए जाएं। यह आदेश चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने दिया।
Honor Killing Threat का मामला
बताया जा रहा है कि दंपति को अपनी मर्जी से शादी करने के बाद ऑनर किलिंग और झूठे केस में फंसाने की धमकी मिल (CG High Court) रही थी। इसी डर के चलते उन्होंने रिट याचिका दाखिल कर सुरक्षा की मांग की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कोरबा एसपी और संबंधित थाना प्रभारी के साथ-साथ उन रिश्तेदारों को भी निर्देशित किया जिन्हें इस मामले में पक्षकार बनाया गया है कि वे पति पत्नी के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में दखल न दें।
कैसे शुरू हुई कहानी
असल में कोरबा जिले के कटघोरा इलाके के रहने वाले चिंटू अग्रवाल और अंजलि शर्मा पहले से एक दूसरे को जानते थे। पड़ोसी होने के कारण दोनों के बीच धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता प्यार में बदल गया। बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला लिया, लेकिन लड़की के परिवार ने इसका विरोध किया।
इसके बाद दोनों ने अपनी मर्जी से 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जयपुर में आर्य समाज में विवाह कर लिया। वहीं सक्षम अधिकारी के सामने शादी का रजिस्ट्रेशन भी कराया और अपने रिश्ते की पुष्टि के लिए शपथ (CG High Court) पत्र दिया। उस समय दोनों बालिग थे, इसलिए कानून के अनुसार यह विवाह पूरी तरह वैध माना गया।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि शादी के बाद से ही लड़की के परिवार की ओर से लगातार धमकियां दी जा रही हैं। इसमें ऑनर किलिंग और झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने जैसी बातें शामिल हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी वजह से दंपति को अपने जीवन और स्वतंत्रता को लेकर लगातार डर बना हुआ है और वे सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे।
राज्य का पक्ष भी आया सामने
राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिका में लगाए गए आरोपों के आधार पर कोई स्पष्ट संज्ञेय अपराध (CG High Court) नहीं बनता है। उनका कहना था कि याचिकाकर्ताओं ने किसी खास घटना, तारीख या समय का उल्लेख नहीं किया है जिससे मामला मजबूत हो सके। इसलिए धमकी के आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं और याचिका खारिज की जानी चाहिए।
CG High Court का बड़ा संदेश
हालांकि डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह किया है। दो वयस्कों को अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह समाज के हित में हैं और ऐसे जोड़ों को किसी भी तरह की धमकी या उत्पीड़न से सुरक्षा मिलनी चाहिए।
