नारायणपुर के कई गांव ऐसे हैं जहां अब भी हालात आसान नहीं माने जाते। लेकिन CG Board Result 2026 ने आज एक अलग तस्वीर दिखा दी। जिन इलाकों को अक्सर नक्सल प्रभाव के कारण पिछड़ा कहा जाता है, वहीं के बच्चों ने इस बार ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया। स्थानीय लोग कह रहे थे कि यह सिर्फ रिजल्ट नहीं, बल्कि हालात को चुनौती देने वाली मेहनत की कहानी है।
रिजल्ट सामने आते ही गांवों में खुशी का माहौल दिखा, जहां सामान्य दिनों में सन्नाटा रहता है वहां आज बच्चों की सफलता की चर्चा हो रही थी। CG Board Result 2026 में नारायणपुर का नाम ऊपर आते ही यह साबित हुआ कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी अगर अवसर और मेहनत साथ हों तो बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
CG Board Result 2026 में 10वीं का मजबूत प्रदर्शन
29 अप्रैल 2026 को Chhattisgarh Board of Secondary Education द्वारा हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा वर्ष 2026 के परिणाम घोषित किए गए। इस बार जिले के विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तर पर खास पहचान बनाई।
जिले के 16 परीक्षा केंद्रों में आयोजित कक्षा 10वीं की परीक्षा में कुल 1547 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 1523 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए जबकि 24 अनुपस्थित रहे। कुल परीक्षा परिणाम 94.80 प्रतिशत दर्ज हुआ। लड़कों का परिणाम 95.09 प्रतिशत और लड़कियों का 94.53 प्रतिशत रहा। इस प्रदर्शन के आधार पर नारायणपुर ने राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया।
12वीं में भी संतोषजनक परिणाम (CG Board Result 2026)
वहीं कक्षा 12वीं की परीक्षा में कुल 1368 परीक्षार्थी दर्ज थे, जिनमें से 1365 विद्यार्थी उपस्थित हुए और 3 अनुपस्थित रहे। कुल परिणाम 86.92 प्रतिशत रहा।
लड़कों का परिणाम 87.23 प्रतिशत और लड़कियों का 86.65 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस प्रदर्शन के साथ कक्षा 12वीं में नारायणपुर जिले ने राज्य स्तर पर 12वां स्थान प्राप्त किया।
चुनौती भरे हालात के बीच सफलता (CG Board Result 2026)
जिले की इस उपलब्धि को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से नक्सल प्रभाव के कारण चुनौतियों से जूझता रहा है। बावजूद इसके छात्रों ने पढ़ाई में लगातार ध्यान बनाए रखा और बेहतर परिणाम हासिल किया।
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देते हुए इसे सामूहिक प्रयास का नतीजा (CG Board Result 2026) बताया है। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों ने यह साबित किया है कि मेहनत और मार्गदर्शन से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।
