Bilaspur High Court Judgment Lingiyadih Housing : हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, कहा- कब्जा देने पर खुद मना किया तो शिकायत का महत्व नहीं

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लिंगियाडीह के शहरी गरीब आवास योजना से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण (Bilaspur High Court Judgment Lingiyadih Housing) फैसला सुनाया है।

जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता देव कुमार निर्मलकर की रिट याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब नगर निगम ने कब्जा देने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी और याचिकाकर्ता ने स्वयं उसे लेने से इनकार कर दिया, तो अब ऐसी शिकायत का कोई कानूनी आधार नहीं रह जाता है।

क्या था पूरा विवाद? (Bilaspur High Court Judgment Lingiyadih Housing)

याचिकाकर्ता देव कुमार निर्मलकर को लिंगियाडीह में मकान संख्या K-04 आवंटित किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि आवंटन के बावजूद उसे भौतिक कब्जा नहीं मिला क्योंकि वहां पहले से ही किसी अन्य का कब्जा था।

इसके बाद निगम ने 15 अक्टूबर 2020 को उसे वैकल्पिक आवास के रूप में मकान संख्या N-01 आवंटित किया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दावा किया कि किश्तें जमा करने के बाद भी उसे इस नए मकान का कब्जा नहीं सौंपा गया और वहां भी अतिक्रमणकारी मौजूद थे।

नगर निगम की दलील: ‘मौके पर बुलाया, पर नहीं आए याचिकाकर्ता’

नगर निगम की ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे ने कोर्ट को बताया कि निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई की थी। 4 फरवरी 2021 को अतिक्रमणकारी को नोटिस दिया गया और पुलिस की सहायता से मकान खाली (Bilaspur High Court Judgment Lingiyadih Housing) कराया गया।

इसके बाद 10 फरवरी 2021 को याचिकाकर्ता को कब्जा लेने के लिए बुलाया गया था। निगम के अनुसार, स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में याचिकाकर्ता ने स्वयं कब्जा लेने से इनकार कर दिया, जिसे बाकायदा ‘कब्जा प्रमाण पत्र’ में दर्ज किया गया है। इसके बाद भी 15 फरवरी को पत्र भेजकर कब्जा लेने का अनुरोध किया गया, लेकिन याचिकाकर्ता उपस्थित नहीं हुआ।

हाई कोर्ट का फैसला: दायित्व पूरा कर चुका है निगम

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि निगम ने अतिक्रमण हटाकर कब्जा सौंपने के अपने दायित्वों का पालन (Bilaspur High Court Judgment Lingiyadih Housing) किया है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक बार कब्जा उपलब्ध करा दिए जाने और याचिकाकर्ता द्वारा स्वयं इसे स्वीकार न करने के बाद, रिट याचिका में उठाई गई शिकायत का कोई महत्व नहीं रह जाता। अदालत ने इस स्तर पर कब्जा सौंपने का नया निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया।

मकान की मरम्मत के लिए खुला है रास्ता

याचिका खारिज करने के साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक राहत जरूर (Bilaspur High Court Judgment Lingiyadih Housing) दी है। अदालत ने उल्लेख किया कि लंबे समय से बंद रहने के कारण मकान को मरम्मत या रखरखाव की आवश्यकता हो सकती है।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मकान की सुध लेने और उसकी मरम्मत के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष उचित आवेदन प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र है। ऐसे आवेदन पर अधिकारियों को कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

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