Bilaspur High Court GST Relief : बिलासपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला, प्री-डिपॉजिट और अंडरटेकिंग जमा करने पर जीएसटी रिकवरी नहीं कर पाएगा विभाग, जानें कोर्ट की शर्तें

बिलासपुर हाईकोर्ट से जीएसटी बकाया वसूली के मामले में कारोबारियों के लिए एक राहत भरी खबर (Bilaspur High Court GST Relief) आई है। ‘मां काली इंडस्ट्रीज’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य कर विभाग की कड़ी वसूली कार्रवाई पर ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हो जाता, तब तक शर्तों के साथ करदाताओं को राहत दी जा सकती है।

ट्रिब्यूनल नहीं बनने तक मिली ‘सुरक्षा’ (Bilaspur High Court GST Relief)

मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता ने राज्य कर विभाग द्वारा जारी 4 नवंबर 2022 और 28 मार्च 2024 के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिसके तहत भारी-भरकम जीएसटी बकाया की वसूली निकाली गई थी।

इसके अलावा, 16 जनवरी 2026 को जारी अटैचमेंट नोटिस (संपत्ति कुर्क करने की सूचना) को भी कटघरे में रखा गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि ट्रिब्यूनल अस्तित्व में न होने के कारण वे अपील नहीं कर पा रहे हैं, ऐसी स्थिति में विभाग की जबरन वसूली गलत है।

सर्कुलर का मिला फायदा, 15 दिनों का समय

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी उस सर्कुलर का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया है कि अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) के अभाव में करदाताओं को केवल इस आधार पर परेशान नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते (Bilaspur High Court GST Relief) हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ता अगले 15 दिनों के भीतर जीएसटी कानून के तहत निर्धारित ‘प्री-डिपॉजिट’ राशि जमा करे। साथ ही, संबंधित अधिकारी के पास यह अंडरटेकिंग (घोषणा पत्र) दे कि ट्रिब्यूनल का गठन होते ही वह विधिवत अपील दायर करेगा।

वसूली पर लगी रोक, व्यापारियों को बड़ी राहत

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि यदि याचिकाकर्ता तय समय सीमा में जरूरी राशि जमा कर देता है और अंडरटेकिंग दे देता है, तो विभाग द्वारा बाकी बचे बकाया की वसूली के लिए की जा रही हर तरह की कार्रवाई पर तत्काल रोक लग जाएगी।

कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि केंद्र सरकार ने अपील दायर करने की समय-सीमा को पहले ही 30 जून 2026 तक बढ़ा (Bilaspur High Court GST Relief) दिया है। इस फैसले के बाद अब उन व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके मामले ट्रिब्यूनल नहीं होने की वजह से लटके हुए हैं और विभाग उन पर संपत्ति कुर्की जैसा दबाव बना रहा था।

Exit mobile version