राजधानी से जुड़े भारतमाला परियोजना के गांवों में इन दिनों जमीन मुआवजे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। गांवों में लोग अब खुलकर उन नामों की बात कर रहे हैं, जिनके परिवारों को करोड़ों रुपए का मुआवजा मिला। कई जगहों पर यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इतनी छोटी छोटी जमीनों के टुकड़े एक ही परिवार के अलग अलग लोगों के नाम कैसे पहुंच गए।
जांच और छापों के बाद अब पूरे मामले की परतें खुलती नजर (Bhratamala Scam) आ रही हैं। सामने आया है कि जमीनों को छोटे हिस्सों में बांटकर बड़े स्तर पर मुआवजे का खेल किया गया। आरोप है कि अफसरों, भूमाफियाओं और कुछ जमीन कारोबारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए का बंदरबांट हुआ।
छोटे टुकड़ों में बांटी गई जमीन (Bhratamala Scam)
जानकारी के मुताबिक भारतमाला परियोजना से जुड़े कई गांवों में जमीनों को एक एक परिवार के अलग अलग सदस्यों के नाम पर बांट दिया गया। कई मामलों में एक परिवार के नाम पर 50 से 60 तक छोटे टुकड़े दर्ज बताए जा रहे हैं। इसी आधार पर करोड़ों रुपए का मुआवजा लिया गया। मामला अभनपुर और कुरुद ब्लॉक के कई गांवों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
इन गांवों में हुआ बड़ा खेल
पड़ताल में नायकबांधा, सातपारा, उरला, मुड़पार उर्फ भेलवाडीह, टोकरो, तर्रा, कोलर, सारखी समेत कुरुद और नांदगांव इलाके के कई गांवों के खसरों में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि जमीनों के छोटे छोटे हिस्से कर मुआवजे की रकम को कई नामों में बांटा गया और फिर करोड़ों रुपए निकाले गए।
रिश्तेदारों के नाम पर लिया करोड़ों का मुआवजा (Bhratamala Scam)
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों ने अपने बेटे, बहू और रिश्तेदारों के नाम पर जमीन दर्ज कराकर बड़ी रकम हासिल की। बनारसी लाल अग्रवाल ने अपने परिवार के नाम पर 34 खसरों से 22 करोड़ 81 लाख रुपए से ज्यादा का मुआवजा लिया। वहीं सत्यनारायण गांधी और गोपालचंद गांधी ने 11 खसरों से 8 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि हासिल की। इसी तरह छोटूराम ने अपने बेटों के नाम पर 13 खसरों से 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुआवजा लिया है।
किसानों से ज्यादा व्यापारियों के नाम
मामले में सबसे ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर जताई जा रही है कि प्रभावित जमीनों में किसानों से ज्यादा बाहरी व्यापारियों के नाम सामने (Bhratamala Scam) आए हैं। बताया जा रहा है कि परियोजना की जानकारी मिलते ही कई कारोबारियों ने गांवों में जमीन खरीदना शुरू कर दिया था। बाद में प्रशासनिक सांठगांठ के जरिए करोड़ों रुपए का मुआवजा हासिल किया गया।
कई नामों पर करोड़ों की राशि
जानकारी के मुताबिक जेपी पांडेय और नेक्स्ट जेने के नाम पर 15 खसरों से 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुआवजा लिया गया। वहीं सूबेलाल ने अपने बेटे बेटियों के नाम पर 8 खसरों से 6 करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त की। अन्नू तारक को भी पांच खसरों से करीब ढाई करोड़ रुपए का मुआवजा मिला है। पूरे मामले को लेकर अब जांच एजेंसियां दस्तावेजों की पड़ताल में जुटी हुई हैं।
