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संपादकीय: ध्वनि विस्तारक यंत्रों के दुरूपयोग पर रोक

Ban on misuse of loudspeakers

Ban on misuse of loudspeakers

Editorial: छत्तीसगढ़ में गणेत्सव पर्व के साथ ही अब त्यौहारों का सिलसिला शुरू हो गया है इसके साथ ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के मनमाने उपयोग को लेकर भी शिकायतें सामने आने लगी है। यह संतोष का विषय है कि इस बार प्रशासन ध्वनि विस्तारक यंत्रों के दुरूपयोग को रोकने के लिए मुस्तैद है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में डीजे के मनमाने दुरूपयोग के खिलाफ कार्यवाही तेज की गई है और कुछ डीजे तथा संबंधित वाहन जब्त किये गये हैं।

राजधानी रायपुर सहित अन्य जिलों में भी कोलाहल अधिनियम का सख्तिपूर्व पालन कराने के निर्देश जारी किये गये हैं जो स्वागत योग्य में कदम है। वास्तव में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के दुरूपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाना निहायत जरूरी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बारे में पहले ही दिशा निर्देश जारी किये हुए हैं जिनका कठोरता पूर्वक पालन कराना शासन प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है।

छत्तीसगढ़ में कोलाहाल अधिनियम को लेकर अब तक छिटपुट कार्यवाही ही देखने को मिली है जबकि जरूरत इस बात की है कि लोगों को बढ़ते सारे प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलाया जाये और इसके लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय की जाये और जो लोग जिम्मेदारी निभाने में कोताही बरतते हो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जाये इस तरह के कारगर कदम उठाने से ही लोगों को ध्वनि प्रदूषण के प्रकोप से राहत मिल पाएगी। उम्मीद की जानी चाहिए की त्यौहारी सीजन में ध्वनि प्रदूषण रोकने शासन प्रशासन उचित पहल करेगा।

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