सरकारी स्कूल में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा सुनाई (B.Ed Course) दे रहा है। कौन सा कोर्स चुनें जिससे आगे चलकर भर्ती में परेशानी न आए। नए नियम लागू होने के बाद कई अभ्यर्थी अपने पुराने फैसलों पर भी दोबारा सोचने लगे हैं और सही जानकारी जुटाने में लगे हैं।
कॉलेजों में दाखिले का दौर शुरू होते ही छात्रों और अभिभावकों के बीच भी इसी विषय पर चर्चा तेज हो गई है। शिक्षक बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए अब सिर्फ डिग्री लेना काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी हो गया है कि किस कक्षा के लिए कौन सी योग्यता मान्य है और किस कोर्स से आगे नौकरी के अवसर मिलेंगे।
प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए अब यही योग्यता जरूरी B.Ed Course
हाल के वर्षों में हुए न्यायिक फैसलों और शिक्षक शिक्षा से जुड़े नए प्रावधानों के बाद प्राथमिक विद्यालयों की भर्ती का नियम पूरी तरह स्पष्ट हो गया है। कक्षा 1 से 5 तक के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अब डीएलएड या बीटीसी को ही अनिवार्य योग्यता माना जाता है। केवल बीएड करने वाले अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
इस व्यवस्था के पीछे तर्क यह है कि छोटे बच्चों को पढ़ाने और उनकी सीखने की प्रक्रिया को समझने के लिए अलग प्रकार की प्रशिक्षण प्रणाली की जरूरत होती है, जो डीएलएड और बीटीसी पाठ्यक्रम में शामिल रहती है।
डीएलएड और बीटीसी किसके लिए बेहतर विकल्प
डीएलएड यानी डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन दो साल का प्रशिक्षण कार्यक्रम है। कई राज्यों में पहले इसे बीटीसी के नाम से जाना जाता था। राज्य के नियमों के अनुसार कहीं 12वीं के बाद तो कहीं स्नातक के बाद इसमें प्रवेश दिया जाता है।
यदि आपका लक्ष्य केवल प्राथमिक विद्यालय में सरकारी शिक्षक बनना है तो यह सबसे उपयुक्त विकल्प माना जाता है। प्राथमिक शिक्षक भर्ती में आमतौर पर बड़ी संख्या में पद भी निकलते हैं, इसलिए इस कोर्स के बाद अवसर अधिक मिलते हैं।
बीएड अब किन पदों के लिए जरूरी
बीएड अब मुख्य रूप से बड़ी कक्षाओं के शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कोर्स में प्रवेश के लिए सामान्य तौर पर स्नातक या स्नातकोत्तर में निर्धारित न्यूनतम अंक जरूरी (B.Ed Course) होते हैं। नए शैक्षणिक सत्र से कुछ विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय बीएड की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है, जबकि सामान्य स्नातकों के लिए दो वर्षीय पाठ्यक्रम जारी रहेगा।
बीएड करने वाले अभ्यर्थी कक्षा 6 से 8, कक्षा 9 और 10 के शिक्षक पदों के साथ ही स्नातकोत्तर होने पर कक्षा 11 और 12 के शिक्षक पदों के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय जैसे संस्थानों में भी यह योग्यता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बारहवीं के बाद सीधे शिक्षक बनने का नया रास्ता
नई शिक्षा नीति के तहत शुरू किया गया समेकित शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम अब भविष्य का महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। यह चार वर्ष का पाठ्यक्रम है जिसमें स्नातक और शिक्षक प्रशिक्षण दोनों साथ पूरे हो जाते हैं। जो विद्यार्थी 12वीं के बाद ही तय कर चुके हैं कि उन्हें आगे चलकर शिक्षक ही बनना है, उनके लिए यह समय बचाने वाला और लंबी अवधि में उपयोगी विकल्प माना जा रहा है।
अपने लक्ष्य के हिसाब से करें फैसला
यदि आपकी तैयारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बनने की है तो डीएलएड या बीटीसी सबसे सही (B.Ed Course) रास्ता है। अगर आपकी रुचि किसी विशेष विषय में है और आप माध्यमिक या उच्च माध्यमिक कक्षाओं को पढ़ाना चाहते हैं तो बीएड आपके करियर के लिए बेहतर रहेगा। वहीं जो छात्र 12वीं के बाद सीधे शिक्षण क्षेत्र में भविष्य बनाना चाहते हैं, उनके लिए समेकित शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम आगे चलकर मजबूत विकल्प साबित हो सकता है।
