असम में सरकार गठन को लेकर राजधानी गुवाहाटी का राजनीतिक माहौल शनिवार शाम अचानक (Assam CM) गर्म हो गया। पार्टी कार्यालय के आसपास नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ी रही। नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर पूरे दिन अलग अलग चर्चाएं चलती रहीं। इसी बीच बड़े नेताओं के शहर पहुंचने के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई।
भाजपा समर्थकों के बीच रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया। कई जगहों पर कार्यकर्ता जीत का जश्न मनाते नजर आए, वहीं राजनीतिक गलियारों में यह सवाल सबसे ज्यादा सुनाई देता रहा कि आखिर राज्य की कमान किसे मिलेगी। पार्टी के अंदर चल रही बैठकों और चर्चाओं पर सबकी नजर टिकी हुई है।
गुवाहाटी पहुंचे बड़े नेता : Assam CM
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार शाम गुवाहाटी पहुंचे। दोनों नेता रविवार को होने वाली भाजपा विधायक दल की बैठक में मौजूद रहेंगे। पार्टी की ओर से बताया गया कि बैठक में विधायक दल के नए नेता का चुनाव किया जाएगा।
नवनिर्वाचित विधायक रविवार सुबह पार्टी मुख्यालय में इकट्ठा होंगे। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी भवन में विधायक दल की औपचारिक बैठक होगी, जहां नए नेता के नाम पर सहमति बनाई जाएगी।
लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटा गठबंधन
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने इस बार भी राज्य में मजबूत जीत दर्ज की है। गठबंधन ने दो तिहाई बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की है। 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 82 सीटें मिली हैं।
इसके अलावा सहयोगी दल असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को 10 10 सीटें हासिल हुई हैं। इस जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल बना हुआ है।
पर्यवेक्षक की भूमिका में रहेंगे नड्डा और सैनी
पार्टी की ओर से कहा गया है कि जेपी नड्डा केंद्रीय पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी निभाएंगे। वहीं नायब सिंह सैनी सह पर्यवेक्षक के रूप में बैठक में शामिल (Assam CM) रहेंगे। दोनों नेताओं की मौजूदगी में विधायक दल का नेता चुना जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व इस बार भी अनुभव और संगठन दोनों को ध्यान में रखकर फैसला कर सकता है।
फिर से मिल सकती है पुरानी जिम्मेदारी
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा हिमंत बिस्वा सरमा के नाम को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि उन्हें एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला विधायक दल की बैठक के बाद ही साफ होगा। फिलहाल पूरे राज्य की नजर रविवार को होने वाली बैठक पर टिकी हुई है, जहां असम की नई सरकार के चेहरे पर मुहर लग सकती है।
