Editorial: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के प्रति सख्त रवैया अपनाने और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अमेरिका के आगे नहीं झुका है और अब तो उसने अमेरिका को झुकने पर बाध्य कर दिया है। ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह पर भारत को आगे भी व्यापार करने के लिए अमेरिका ने छूट प्रदान कर दी है जो भारत की एक और बड़ी कूटनीतिक जीत है। गौरतलब है कि चाबहार बंदरगाह से व्यापार की सुविधा आगे बढ़ जाने के कारण अब भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार सुचारू रूप से हो पाएगा। गौरतलब है कि अफगानिस्तान चारों ओर से कई देशों से घिरा हुआ है उसके पास कोई समुद्र नहीं है।
नतीजतन उसे भारत से या अन्य देशों से व्यापार करने के लिए पाकिस्तान पर निर्भर रहना पड़ता था। जिसका पिछले कई दशकों से पाकिस्तान नाजायज फायदा उठाता रहा है और इसकी एवज में अफगानिस्तान से भारी शुल्क से वसूलता रहा है। अभी तो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जम के हालात बन गये हैं। फिलहाल भले ही संघर्ष विराम हो गया है लेकिन कभी भी यह टूट सकता है और दोनों देशों के बीच जंग हो सकती है। ऐसे में पाकिस्तान के रास्ते भारत अफगानिस्तान को जो समान भेजता है उसे पाकिस्तान रोक लेगा। इस समस्या का समाधान करने भारत ने चाबहार बंदरगाह से व्यापार जारी रखने का जो फैसला लिया है उसपर अमेरिका को सहमत होना पड़ा है। यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। वहीं इससे अफगानिस्तान की तालिबान सरकार भारत की और मुरीद बन गई है।
इस बीच खबर यह है कि अफगानिस्तान अपने बगराम एयरबेस को भारत के हवाले करने का मन बना चुका है। अफगानिस्तान स्थित बगराम एयरबेस न सिर्फ एशिया का बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सुरक्षित एयरबेस है। जिसे पांच दशक पूर्व रूस ने बनवाया था और दो दशकों तक इस पर अमेरिका ने अपना कब्जा कायम रखा था। और इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर दिया था।
बगराम ऐयरबेस में दस हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक भी तैनात थे। किन्तु जा ेवाइडन के कार्यकाल में जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान चली गई तो बगराम ऐयरबेस पर पाकिस्तान और चीन दोनों ने ही उसके सामरिक महत्व को देखते हुए अपनी गिद्ध दृष्टि गड़ा दी थी लेकिन तालिबान ने दोनों को ही ठेंगा दिखा दिया था इसके बाद अब अमेरिका फिर से बगराम एयरबेस पर कब्जा करने की फिराक में है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि बगराम एयरबेस को छोडऩा जो वाइडन सरकार की बड़ी गलती थी जिसे वे सुधारेंगे और बगराम एयरबेस पर फिर से काबिज होंगे लेकिन तालिबान ने अमेरिका के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है और अब उसने बगराम एयरबेस भारत के हवाले करने का मन बना लिया है।
यदि ऐसा हुआ तो भारत की यह बड़ी उपलब्धि होगी। गौरतलब है कि भारत का ताजिकिस्तान में जो एक मात्र एयरबेस था उसके एग्रीमेन्ट की अवधि खत्म हो गई है जिसे आगे बढ़ाने की भारत ने पहल की थी लेकिन पाकिस्तान और तुर्की ने ताजिकिस्तान पर दबाव डालकर उस एग्रीमेन्ट को आगे बढऩे से रोक दिया था। अब भारत को बगराम एयरबेस मिल जाता है तो इस क्षति की पूर्ति हो जाएगी और भारत तथा अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हो जाएंगे। साथ ही पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रखना भारत के लिए और आसान हो जाएगा।

