Editorial: 4 मई को बंगाल सहित पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने जा रहे हैं। वैसे तो ये सभी राज्य महत्वपूर्ण हैं लेकिन पूरे देश की नजर बंगाल की चुनाव परिणाम पर टिकी हुई है। इसकी एक वजह तो यह है कि बंगाल में आजादी के बाद से पहली बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ। दोनों चरणों को मिलाकर पहली बार सर्वाधिक 92.47 प्रतिशत मतदान हुआ है। इसमें भी पुरूषों के मुकाबले महिलाओं ने डेढ़ प्रतिशत ज्यादा मतदान किया है। महिलाओं का यह डेढ़ प्रतिशत ज्यादा मतदान भी चुनावी नतीजों में बड़ा अंतर डालेगा। इसमें कोई दो मत नहीं कि बंगाल की महिलाओं की पहली पसंद ममता बनर्जी ही रही हैं किन्तु केन्द्र की एनडीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक से लेकर महिलाओं के उत्थान की दिशा में जो कारगर कदम उठाये हैं उससे बंगाल की महिला शक्ति भी निश्चत रूप से प्रभावित हुई होगी।
बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच कितना नजदीकी संघर्ष रहा है इसका अनुमान एग्जिट पोल से भी लगाया जा सकता है। एग्जिट पोल ने पांचो राज्यों के पूर्वानुमान दिखाएं हैं जिनमें से असम, केरल, तमिलनाडु, पुंडीचेरी के एग्जिट पोल पर लगभग सभी सहमत हैं किन्तु बंगाल के एग्जिट पोल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है यह बात अलग है कि अधिकांश एग्जिट पोल बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने का पूर्वानुमान लगा रहे हैं वहीं एक दो एग्जिट पोल बंगाल में फिर से ममता बनर्जी की ही सरकार बनने की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
एक प्रमुख सर्वे ऐजेंसी ने तो एग्जिट पोल करा लिया लेकिन उसका परिणाम सर्वाजनिक ही नहीं किया। इसी से इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम किसी के भी पक्ष में जा सकता है और चुनावी ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है। वैसे भी एग्जिट पोल के अनुमान पहले भी कई बार गलत साबित हो चुके हैं कभी ये सत्यता के निकट होते हैं तो कभी ये एकदम उलट हो जाते हैं इसलिए बंगाल चुनाव पर सब की नजर वहीं लगी हुई है वैसे यह एक बड़ी उपलब्धि मानी चाहिए कि बंगाल में मतदान का नया कीर्तिमान बना और इसी के साथ यह भी पहली बार हुआ कि चुनाव के दौरान वहां हिंसा का घटनाएं छिटपुट ही हुई। इसके पूर्व बंगाल में चाहे कोई भी चुनाव हो हिंसा का तांडव होता रहा है किन्तु इस बार चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए वहां सुरक्षा के चाकचौबंध इंतेजाम किये थे यही वजह है कि चुनाव के दौरान वहां हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई।
हालांकि दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई जगह टीएमसी और भाजपा समर्थकों के बीच टकराव की स्थिति बनी और डॉयमंड हारबर के फलता बूथ पर ईवीएम में भाजपा प्रत्याशी के नाम और चुनाव चिंह पर टेप चिपकाए जाने की घटना भी सामने आई जिसकी चुनाव आयोग से शिकायत की गई है। ऐसे कुछ मतदान के केन्द्रों में जहां टीएमसी समर्थकों ने गड़बड़ी की कोशिश की वहां दुबारा मतदान कराया जा सकता है। इन घटनाओं को छोड़ दें तो बंगाल का चुनाव पहली बार शांतिपूर्ण रहा कड़ी सुरक्षा के कारण ही लोग निर्भिक होकर लोग मतदान के लिए घरों से निकले इसके लिए चुनाव आयोग तथा केन्द्रीय सुरक्षाबल के जवान साधुवाद के पात्र हैं। अब देखना यह होगा कि चार मई को बंगाल में ईवीएम किसके पक्ष में नतीजे देती है।
भाजपा और टीएमसी दोनों ही अपनी सरकार बनने का दावा कर रहे हैं। वहीं ममता बनर्जी अभी से चुनाव परिणाम को लेकर ईवीएम पर निशाना साध रहीं हैं। कोलकाता में एक मतदान केन्द्र के पास टीएमसी समर्थकों ने जमकर हंगामा किया और यह आरोप लगाया कि वहां ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। इसकी सुचना मिलने पर खुद ममता बनर्जी ही रात में वहां पहुंच गई और उन्होंने भी ईवीएम के साथ छेड़छाडखानी के आरोप लगाए। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि स्ट्रांग रूम में इवीएम की कड़ी सुरक्षा की जा रही है वहां किसी भी तरह की गड़बड़ी किये जाने की कतई कोई संभावना नहीं है।
बहरहाल चुनाव परिणाम घोषित होने तक इस तरह के आरोप प्रत्यारोप तो लगते रहेंगे लेकिन चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद बंगाल में और ज्यादा शर्तकता बरतने की आवश्यकता पड़ेगी। यदि चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में गये तो टीएमसी समर्थक बवाल काट सकते हैं। ऐसे में वहां और कुछ दिनों तक सुरक्षा के कड़े इंतेजाम रखना निहायत जरूरी है।
