संपादकीय: ईरान को फिर ट्रंप की धमकी

Editorial: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है कि वह दूसरे दौर की प्रस्तावित शांति वार्ता में भाग लें और अमेरिका की शर्तों को मानकर डील फाइनल करे अन्यथा अमेरिका और ईरान के बीच फिर जंग होगी और ईरान को भारी तबाही का सामना करना पड़ेगा। समझ में नहीं आता कि डोनाल्ड ट्रंप आखिर चाहते क्या हैं। एक ओर तो वे ईरान के साथ समझौता करने के लिए मरे जा रहे हैं और दूसरी ओर ईरान को धमकी देने से बाज भी नहीं आ रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने शांति वार्ता के दूसरे दौर के लिए ईरान को राजी करने के लिए पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर को ईरान भेजा और जहां वे ईरान को अमेरिका की शर्तों को अवगत कराने के बाद अमेरिका जाएंगे और डोनाल्ड ट्रंप से चर्चा करने के बाद अगली शांति वार्ता इस्लामाबाद में ही रखने की योजना को फाइनल किया जाएगा। जब डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ बातचीत करने की भूमिका बना ही रहे हैं तो उन्हें ईरान को बार बार इस तरह की धमकी देने से बाज आना चाहिए।

सारी दुनिया चाहती है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग रूके ताकि दुनिया के कई देशों को पिछले डेढ़ माह से तेल और गैस के भयावह संकट का जो सामना करना पड़ रहा है वह संकट दूर हो। किन्तु डोनाल्ड ट्रंप की इस तरह की धमकी चमकी के कारण दोनों देशों के बीच शांति वार्ता में व्यवधान पड़ सकता है। इस बीच एक अच्छी बात यह हुई है कि डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिनों का संघर्ष विराम हो गया है। उल्लेखनीय है कि ईरान ने पहले दौर की शांति वार्ता का एक तरह का बहिष्कार इसीलिए किया था कि इजराइल लेबनान पर अभी भी बम बरसा रहा है।

अब इजराइल और लेबनान में सीजफायर हो जाने के बाद ईरान का रूख नरम पड़ सकता है और वह दूसरे दौर की शांति वार्ता के लिए तैयार हो सकता है। किन्तु डोनाल्ड ट्रंप यदि कट्टे की नोक पर अपनी शर्तें मनवाने की कोशिश करते रहेंगे और ईरान को इसी तरह की धमकी चमकी देंगे तो बात बिगड़ सकती है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यदि ईरान अमेरिका की शर्तों को कबूल कर लेता है और दोनों के बीच सहमति बन जाती है तो वे खुद पाकिस्तान जाने के लिए भी तैयार हैं।

इधर अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होर्मूज की नाकाबंदी और कड़ी कर दी है और वहां से गुजरने वाले दस जहाजों के वापस लौटा दिया है। यही नहीं बल्कि वहां अमेरिकी सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा दी है। ऐसी स्थिति में ईरान की नाराजगी बढ़ सकती है। बेहतर होगा कि ईरान और अमेरिका के बीच जो सप्ताह का सीजफायर हुआ है उसके तहत डोनाल्ड ट्रंप जुबानी फायरिंग से भी फिलहाल परहेज करें ताकि दूसरे दौर की बातचीत हो सके और जंग टल सके।

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